World Sickle Cell Day 2022: जानिए सिकल सेल डिसऑर्डर पर इस साल की थीम, भारत में कब आया था पहला मामला

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World Sickle Cell Day 2022 : हर साल आज के दिन ‘वर्ल्ड सिकल सेल अवेयरनेस डे’ के तौर पर मनाया जाता है. यह रेड ब्लड सेल डिसऑर्डर से संबंधित एक जेनेटिक बीमारी है, जिसमें व्यक्ति के शरीर में रेड ब्लड सेल की कमी होती है. इसे सिकल सेल एनीमिया के नाम से भी जाना जाता है. हर साल इस दिन को मनाए जाने का उद्देश्य सिकल सेल डिसऑर्डर के प्रति जागरूकता फैलाना है.

यूनाइटेड नेशन जनरल असेंबली ने साल 2008 में सिकल सेल डिसऑर्डर को पब्लिक हेल्थ से जुड़ी समस्या के तौर पर पहचानते हुए इसके प्रति जागरूकता फैलाने के लिए इस दिन की शुरुआत की थी. सिकलसेलसोसाइटी में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिकल सेल डिसऑर्डर एक ऐसी स्थिति है, जिसमें रेड ब्लड सेल की कमी होने की वजह से शरीर के हर हिस्से में ऑक्सीज़न ठीक तरह से नहीं पहुंच पाता है.

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सिकल सेल एनीमिया से जुड़ी ज़रूरी बातें
सिकल सेल एनीमिया असल में कई शारीरिक समस्याओं की वजह से होता है, जो रेड ब्लड सेल को प्रभावित करता है. इस बीमारी से जुड़ी सबसे अहम बात यह है कि किसी व्यक्ति को यह रोग सिर्फ जेनेटिक कारणों से ही हो सकता है. इसके किसी और तरह से होने की आशंका नहीं होती है. हमारे शरीर में ब्लड सेल्स गोलाकार में होते हैं, जबकि सिकल सेल समस्या से जूझने वाले लोगों के ब्लड सेल्स कठोर और नुकीले आकार में बदल जाते हैं. इनकी वजह से बॉडी के हर हिस्से में ऑक्सीज़न ठीक तरह से नहीं पहुंच पाता है. ऐसी स्थिति में शरीर में अत्यधिक दर्द हो सकता है.

सिकल सेल अवेयरनेस थीम 2022
इस साल सिकल सेल एनीमिया की थीम ‘शाइन द लाइट ऑन सिकल सेल’ यानी सिकल सेल पर रोशनी डालने से जुड़ा है.

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भारत में सिकल सेल डिसऑर्डर का पहला मामला
नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में इस रोग से जुड़ा पहला मामला साल 1952 में सामने आया था. यह मामला नीलगिरि पहाड़ियों पर रहने वाले शख्स में देखने को मिला था. मौजूदा समय में भारत में इससे जुड़े मामले करीब हर क्षेत्र से सामने आ रहे हैं. टाइम्सऑफइंडिया में छपी एक खबर के मुताबिक, मध्य प्रदेश के कुल 4 जिलों में 75% सिकल सेल एनीमिया के मामले सामने आए हैं. यह आंकड़े साल 2020-2021 के हैं. ये सभी आदिवासी बाहुल्य जिले हैं.

Tags: Fitness, Health, Lifestyle



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