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World Brain Tumour Day 2022: बच्चों में ब्रेन ट्यूमर कितना घातक? एक्सपर्ट से जानें इसके लक्षण, कारण, जोखिम

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Brain Tumor in Kids: आज (8 जून) के दिन दुनिया भर में ‘वर्ल्ड ब्रेन ट्यूमर डे’ मनाया जाता है. इस दिवस का मुख्य उद्देश्य है ब्रेन ट्यूमर के बारे में लोगों को जागरूक करना. इस दिन कई कैंपेन, कार्यक्रम, रैलियों के जरिए लोगों को ब्रेन ट्यूमर के रिस्क, इसके लक्षणों के बारे में जानकारी दी जाती है. जिन लोगों को यह बीमारी है और जो अपना इलाज नहीं करा सकते, उनकी मदद करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया जाता है. ‘विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस’ को जर्मन ब्रेन ट्यूमर एसोसिएशन (एक नॉनप्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन) द्वारा वर्ष 2000 में पहली बार आम जनता में ब्रेन ट्यूमर के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए इस दिन की शुरुआत की गई थी. यह संगठन वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य पेशेवरों के अलावा ब्रेन ट्यूमर के मरीजों और उनके परिवार के सदस्यों को भी सहायता प्रदान करता है. ब्रेन ट्यूमर घातक हो सकता है, यदि इसके लक्षणों को पहचानकर तुरंत इलाज ना किया जाए. मस्तिष्क का ये ट्यूमर सिर्फ वयस्कों ही नहीं, बल्कि बच्चों में भी होता है. हमनें जाना, इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल (दिल्ली) के एडवाइजर स्ट्रोक एंड न्यूरोलॉजी, सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. पी. एन. रंजन से बच्चों में होने वाले ब्रेन ट्यूमर के कारण, लक्षण और इलाज के बारे में विस्तार से.

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क्या है ब्रेन ट्यूमर

ट्यूमर एक तरह का गांठ या असामान्य रूप से कोशिकाओं की वृद्धि है. शरीर में मुख्य रूप से दो तरह के ट्यूमर्स होते हैं, बिनाइन और मैलिग्नेंट. यदि ट्यूमर में कोशिकाएं सामान्य हैं, तो यह बिनाइन ट्यूमर है. संभवत: बिनाइन ट्यूमर तब होता है, जब अंदर ही अंदर कुछ गलत होता है, जिससे कोशिकाएं बढ़ जाती हैं और गांठ का निर्माण कर देती हैं. यदि कोशिकाएं असामान्य और अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं, तो वे कैंसर कोशिकाएं हैं, जो बेहद घातक हो सकता है. यह ट्यूमर मैलिग्नेंट होते हैं. ब्रेन ट्यूमर की शुरुआत तब होती है, जब मस्तिष्क के किसी भी हिस्से में असामान्य कोशिकाएं उत्पन्न होने लगती हैं. यह ट्यूमर नॉन-कैंसर युक्त और  कैंसर युक्त हो सकते हैं.

बच्चों में ब्रेन ट्यूमर.

बच्चों को भी होता है ब्रेन ट्यूमर

बच्चों में होने वाला ब्रेन ट्यूमर बच्चों के मस्तिष्क या ऊतकों में होने वाली असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि है. बच्चों में होने वाले ब्रेन ट्यूमर के कई अलग-अलग प्रकार हैं, जिनमे से कुछ कैंसर रहित (बिनाइन) और कुछ कैंसरयुक्त (मैलिग्नेंट) होते हैं.

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बच्चों में ब्रेन ट्यूमर के लक्षण

बच्चों में इसके लक्षण ट्यूमर के आकार पर निर्भर करते हैं. ट्यूमर किस भाग में है और मस्तिष्क के उस भाग को किस तरह और किस हद तक प्रभावित कर सकता है, लक्षण भी उसी आधार पर नज़र आते हैं. सिर के अंदर दबाव जितना होना चाहिए, उससे अधिक होने के कारण लक्षण नजर आते हैं. ट्यूमर जब बढ़ता है, तो यह नॉर्मल ब्रेन को नुकसान पहुंचाने लगता है और मस्तिष्क में द्रव के प्रवाह को बाधित कर सकता है. इसे बढ़ा हुआ इंट्राक्रेनियल दबाव कहते हैं. इस वजह से बच्चों में ब्रेन ट्यूमर के निम्न लक्षण नज़र आ सकते हैं-

-सुबह में अक्सर सिरदर्द होना
-सुबह में उल्टी होना या बीमार महसूस करना
-दौरा पड़ना
-चिड़चिड़ा महसूस करना
-रोजमर्रा की चीजों के प्रति रुचि कम होना
-आंखों से संबंधित समस्या होना
-आंखों का मवूमेंट असामान्य होना
-धुंधलापन या दोहरी दृष्टि
-जल्दी थकान महसूस करना
-बिना कारण अधिक नींद आना
-भ्रम, याद्दाश्त संबंधित समस्या
-सुनाई देने में समस्या
-संतुलन बनाने, चलने में परेशानी होना
-शरीर के एक तरफ कमजोरी महसूस होना
-व्यवहार में बदलाव

ब्रेन ट्यूमर के लक्षण

बच्चों में ब्रेन ट्यूमर के लक्षणों को पहचानें.

ब्रेन ट्यूमर रिस्क फैक्टर्स

प्राइमरी ब्रेन ट्यूमर से ग्रस्त अधिकतर बच्चों में ट्यूमर के कारणों का पता नहीं चल पाता है, लेकिन कुछ खास प्रकार के ब्रेन ट्यूमर जैसे मेडुलोब्लास्टोमा (Medulloblastoma) बच्चों में बेहद कॉमन है. ब्रेन ट्यूमर का फैमिली हिस्ट्री या जेनेटिक सिंड्रोम का पारिवारिक इतिहास कुछ बच्चों में ब्रेन ट्यूमर होने के रिस्क को बढ़ा सकते हैं.

बच्चों में ब्रेन ट्यूमर का इलाज

इलाज और जल्दी ठीक होने की संभावना ट्यूमर के साइज, प्रकार, दिमाग में उसकी स्थिति, बच्चे की उम्र, बच्चे की जेनरल सेहत, मस्तिष्क में कहां तक ट्यूमर फैला है आदि पर निर्भर करता है. हालांकि, आज नई एडवांस तकनीक आने के बाद इलाज की सुविधा पहले से कहीं बेहतर हो गई है. वयस्कों में होने वाले ब्रेन ट्यूमर का इलाज बच्चों में होने वाले ब्रेन ट्यूमर के इलाज से बिल्कुल अलग होता है.

बच्चे को ब्रेन ट्यूमर होने पर यूं बनाएं जिंदगी आसान

जिन बच्चों को ब्रेन ट्यमर की समस्या होती है, उन्हें इलाज के दौरान भी स्पेशल केयर की ज़रूरत होती है. ऑन्कोलॉजिस्ट के साथ अन्य हेल्थकेयर चिकित्सक भी इलाज के बाद किसी भी तरह के प्रभावों के नजर आने पर ट्रीटमेंट करते हैं. वे देखते हैं कि कहीं ट्यूमर फिर से वापस तो नहीं आ रहा है. इसके लिए वे ब्रेन ट्यूमर के लक्षणों पर नजर रखते हैं. इमेजिंग टेस्ट और अन्य परीक्षण की जाती है. साथ ही ट्यूमर या उपचार से होने वाली समस्याओं को अन्य डॉक्टर्स भी देखते हैं. यदि ब्रेन ट्यूमर के कारण बच्चे को आंख से संबंधित कोई समस्या होती है, तो उसे नेत्र चिकित्सक से दिखाना होगा. साथ ही बच्चे को थेरेपी की भी आवश्यकता पड़ सकती है, ताकि उसका चलना-फिरना, मांसपेशियां मजबूत हों. इसके लिए फिजिकिल और ऑक्युपेशनल थेरेपिस्ट की ज़रूरत पड़ सकती है. बच्चे की स्पीच प्रभावित होती है, तो उसे स्पीच थेरेपिस्ट देखते हैं.

ब्रेन ट्यूमर से ग्रस्त बच्चे की ऐसे करें देखभाल

-यदि बच्चे को खाना खाने में परेशानी होती है, तो किसी डिइटिशियन की राय लें.
-बच्चा बहुत अधिक थकान, सुस्ती महसूस करे, तो उसे एक्टिविटी और आराम के बीच संतुलन स्थापित करने में मदद करें.
-बच्चे को एक्सरसाइज करने के लिए प्रोत्साहित करें. इससे उसकी संपूर्ण सेहत अच्छी बनी रहेगी.
डॉक्टर से जब भी मिलने का समय हो, ज़रूर ले जाएं.

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