Rishabh Pant Accident: गजब है झपकी का साइंस, नौजवानों को ज्यादा लेती है लपेटे में, बचे रहते उम्रदराज

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हाइलाइट्स

झपकी आने का मुख्‍य कारण थकान और नींद पूरी न होना ही होता है.
कुछ पलों की इस नींद को इंसान का दिमाग़ याद नहीं रखता.
ड्राइविंग जैसा एकरसता वाला काम करते वक्‍त भी झपकी ज्‍यादा आती है.

मननई दिल्‍ली. टीम इंडिया के विकेटकीपर ऋषभ पंत एक सड़क हादसे (Rishabh Pant Accident) में गंभीर रूप से चोटिल हो गए हैं. पंत की बीएमडब्‍ल्‍यू कार दिल्ली-देहरादून हाइवे पर शुक्रवार तड़के दुर्घटनाग्रस्त हो गई. पंत दिल्ली से अपने घर रुड़की जा रहे थे. कार में वह अकेले थे. बताया जा रहा है कि नींद में झपकी आने की वजह से यह हादसा हुआ है. रात को झपकी आने से हुआ यह कोई पहला हादसा नहीं है. देशभर में हर साल ड्राइवर को झपकी आने से सैकड़ों दुर्घटनाएं होती हैं.

झपकी आने का मुख्‍य कारण थकान और नींद पूरी न होना ही होता है. अक्‍सर विशेषज्ञ ड्राइवरों को सलाह देते हैं कि उन्‍हें कभी भी नींद पूरी किए बिना ड्राइविंग नहीं करनी चाहिए. लेकिन प्रोफेशनल ड्राइवर्स से लेकर आम लोग तक इस सलाह का पालन नहीं करते और नुकसान उठाते हैं.

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बीबीसी डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंग्‍लैंड की लफ़बोरो यूनिवर्सिटी के स्लीप रिसर्च सेंटर के प्रो. जिम हार्न का कहना है कि 5 से 10 सेकेंड की नींद को झपकी कहते हैं. इसमें इंसान का दिमाग बिना चाहे ही सो जाता है. झपकी लेने के बाद व्यक्ति एक झटके के साथ उठता है. दिलचस्प बात ये है कि कुछ पलों की इस नींद को इंसान का दिमाग याद नहीं रखता. यही सबसे खतरनाक बात है. नींद आने का पता न चलने पर ड्राइवर गाड़ी चलाता रहता है.

क्‍यों आती है झपकी?
झपकी आने का प्रमुख कारण थकान होती है. ड्राइविंग जैसा एकरसता वाला काम करते वक्‍त भी झपकी ज्‍यादा आती है. प्रोफेसर गार्ने का कहना है कि ज्‍यादा देर तक काम करने और पूरी नींद न लेना, झपकी आने का प्रमुख कारण है. दोपहर के वक्‍त और रात को गाड़ी चलाते वक्‍त झपकी ज्‍यादा आती है. इसका कारण यह है कि दोपहर में शरीर में ऊर्जा का स्तर कम होता है. इसी तरह रात को भी झपकी इसलिए आती है, क्‍योंकि रात का वक्त सोने का होता है. आपको यह जानकार हैरानी होगी कि युवा ड्राइवरों को उम्रदराज के मुकाबले ज्‍यादा झपकी आती है, क्‍योंकि युवा व्‍यक्ति को नींद की ज्‍यादा जरूरत होती है.

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झपकी आने का कैसे चलेगा पता
अगर आपको यह याद नहीं है कि आप थोड़ी देर पहले कौन-सी जगह से गुजरे थे, तो यकीनन आपको झपकी आई थी. ऐसी स्थिति में आपको बिल्‍कुल भी गाड़ी नहीं चलानी चाहिए और गाड़ी रोककर थोड़ी देर के लिए टहलना चाहिए और पानी पीना चाहिए.

कैसे बचें इससे?
प्रोफेसर हार्ने का कहना है कि जब भी ड्राइवर को नींद महसूस हो तो उसे गाड़ी को किसी सुरक्षित जगह पर रोक देना चाहिए. फिर उसे 150 ML कैफीन वाले चाय या कॉफी जैसे पेय पदार्थ का सेवन करना चाहिए. कैफीन का असर होने में 20 मिनट लगते हैं. इसलिए चाय या कॉफी पीने के 20 मिनट बाद ही ड्राइविंग शुरू करें.

इन बातों का रखें ख्‍याल

  • जहां तक हो सके, नींद पूरी किए बिना ड्राइविंग न करें.
  • 3 से 4 घंटे की ड्राइविंग पर गाड़ी रोककर चाय या पानी जरूर पीएं.
  • रात के वक्‍त ड्राइविंग करते वक्‍त थोड़े- थोड़े अंतराल पर आंखों पर पानी के छींटे मारें.
  • अगर शरीर में सुस्ती आए तो तत्काल गाड़ी रोक दें.
  • ड्राइवर की सीट के बगल में बैठने वाले को सोना नहीं चाहिए.
  • ऐसे गाने गाड़ी में बजाएं, जिनके शब्द आप जानते हैं ताकि आप उनके साथ-साथ गा सकें और अपने मस्तिष्क को उत्तेजित कर सकें.
  • शराब पीकर गाड़ी चलाना तो कानूनन भी बड़ा जुर्म है तो इससे बचें.
  • अगर आप किसी बीमारी की दवा ले रहे हैं, तो ये दवाएं लेकर भी ड्राइविंग करने से बचें.

Tags: Accident, Auto News, Better sleep, Car driver, Rishabh Pant



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