National Anthem: बंंगाली भजन ‘भारतो भाग्य बिधाता’ का पहला छंंद है देश का राष्ट्रगान, जानें रोचक बातें..

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हम देशवासी जैसे ही जन-गण-मन यानी राष्ट्रगान (National Anthem) सुनते हैं तो हमारे भीतर की देश प्रेम की भावना जाग जाती है और हम सभी इसके सम्मान में खड़े हो जाते हैं। राष्ट्रगान भी किसी देश के लिए एक राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में कार्य करता है। एक भारतीय होने के नाते देश का राष्ट्रगान हम सभी के लिए एकता के सूत्र के रूप में कार्य करता है लेकिन अभी भी हम इससे जुड़ी कई रोचक बातों से अंजान हैं। आइए इन सभी बातों को एक-एक कर जान लेते हैं।

1- भारत का राष्ट्रगान यानी जन-गण-मन नोबेल पुरस्कार विजेता रविंद्र नाथ टैगोर द्वारा लिखा गया था। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं कि उनके लिखते के साथ ही इसे राष्ट्रगान की उपाधि दी गई थी। जन-गण-मन को राष्ट्रगान के रूप में 24 जनवरी 1950 को अपनाया गया।

2- भारतीय राष्ट्रगान रविंद्र नाथ टैगोर द्वारा लिखित एक बंगाली भजन ‘भारतो भाग्य बिधाता’ का पहला छंद है। इसे भारत की संविधान सभा द्वारा 24 जनवरी 1950 को भारतीय राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया था।

3- भारत के राष्ट्रगान यानी जन-गण-मन की पंक्तियां मूल रूप से राग अलहैया बिलावल में सेट की गई थीं, लेकिन इसे राग के शास्त्रीय रूप में थोड़े बदलाव के साथ गाया जाता है।

4- अगर बात वैश्विक स्तर की हो तो 1942 में हैम्बर्ग में पहली बार ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया गया था।

5- 2015 में राजस्थान के राज्यपाल ने ‘अधिनायक’ शब्द को ‘मंगल’ शब्द से बदलने की मांग की थी। इस मांग को उस आधार पर किया गया जो टैगोर ने पहले ही 1939 में खंडित कर दिया था।

6- 1911 में कलकत्ता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक सम्मेलन में ‘जन गण मन’ का पहला संस्करण गाया गया था।

7- भारत के राष्ट्रगान के ऑफिशियल संस्करण में कानूनन जन-गण-मन को गाने में 52 सेकंड का समय लगना चाहिए, न कि 54 सेकंड का।

8- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 ए (ए) में कहा गया है कि भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों और संस्थानों, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करे।



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