Mangla Gauri 2022 Vrat: सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत का संयोग

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Sawan Second Mangla Gauri Vrat 2022: सावन के दूसरे मंगला गौरी व्रत पर सावन की शिवरात्रि होने से व्रत का महत्व दोगुना बढ़ गया है. शिव-गौरी का योग बनने से देवी पार्वती और भगवान शंकर दोनों का आशीर्वाद पाने का मौका है. शिव-गौरी का साथ पूजन करने से वैवाहिक जीवन में कभी तनाव नहीं आता साथ ही संतान सुख की प्राप्ति होती है. मंगला गौरी व्रत सावन के हर मंगलवार को रखा जाता है. ये व्रत देवी पार्वती को समर्पित है. आइए जानते हैं मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि और मुहूर्त.

सावन का दूसरे मंगला गौरी व्रत 2022 मुहूर्त (Sawan second Mangla gauri vrat 2022 muhurat)

  • अभिजीत मुहूर्त – 11.48 AM –  12.41 PM (26 जुलाई 2022)
  • अमृत काल – 04.53 PM – 06.41 PM (26 जुलाई 2022)
  • ब्रह्म मुहूर्त – 03.58 AM – 04.46 AM (26 जुलाई 2022)
  • सर्वार्थ सिद्धि योग – 25 जुलाई 2022, 5.38 AM से 26 जुलाई 2022 01.14 PM

सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत 2022 पूजा विधि (Sawan Mangla Gauri 2022 Puja vidhi)

  • मंगला गौरी व्रत में सुबह स्नान आदि के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें.
  • मां मंगला गौरी की तस्वीर पूजा की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर स्थापित करें.
  • माता पार्वती को सुहाग का सामान जैसे लाल चूड़ियां, लाल चुनरी, कुमकुम, आदि अर्पित करें
  • मां मंगला गौरी को लाल पुष्प,  इत्र, चावल, धूप, दीप, नैवेद्य, लौंग, इलायची, नारियल
  • के साथ पूरा सोलह श्रृंगार का सामान चढ़ाएं
  • आटे के दीपक बनाकर मां पार्वती के समक्ष जलाएं
  • 5 प्रकार के सूखे मेवे और सात प्रकार के अनाज आदि चढ़ा दें
  • पूजा में इस मंत्र का जाप करें – गौरी मे प्रीयतां नित्यं अघनाशाय मंगला।
  • सौभाग्यायास्तु ललिता भवानी सर्वसिद्धये।।
  • भोग लगाकर माता की आरती करें. ये व्रत निराहार रखने से हर इस्छा पूर्ण होती है. शाम के समय व्रत का पारण करें.

मां मंगला गौरी की आरती (Mangla gauri aarti)

जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता

ब्रह्मा सनातन देवी शुभ फल दाता। 

जय मंगला गौरी…।

अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता,

जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता।

 जय मंगला गौरी…।

सिंह को वाहन साजे कुंडल है,

साथा देव वधु जहं गावत नृत्य करता था। 

जय मंगला गौरी…।

सतयुग शील सुसुन्दर नाम सटी कहलाता,

हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता। 

जय मंगला गौरी…।

शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता,

सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाता। 

जय मंगला गौरी…।

सृष्टी रूप तुही जननी शिव संग रंगराताए

नंदी भृंगी बीन लाही सारा मद माता। 

जय मंगला गौरी…।

देवन अरज करत हम चित को लाता,

गावत दे दे ताली मन में रंगराता।

जय मंगला गौरी…।

मंगला गौरी माता की आरती जो कोई गाता

सदा सुख संपति पाता।

जय मंगला गौरी माता, 

जय मंगला गौरी माता।।

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