Maharashtra: कैसे ‘दही हांडी’ के जरिए शिवसेना को उसके गढ़ में कमजोर करने में जुटी BJP, जानें पूरी राजनीति

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महाराष्ट्र में आखिरकार दही-हांडी को एक ‘खेल’ का दर्जा दे दिया गया है। लेकिन राज्य में राजनीति का खेल अभी थमा नहीं है। खासकर भाजपा-एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना और उद्धव ठाकरे के समर्थन वाली शिवसेना के बीच। इस राजनीति में एंट्री लेने वाला एक और दल महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) भी है। जन्माष्टमी के दौरान खेला जाने वाला दही हांडी लगभग पूरे महाराष्ट्र में प्रचलित है। हालांकि, अगर मौजूदा समय में देखें तो इसे लेकर राजनीति मुंबई में सबसे तेज है। 

कोरोनावायरस महामारी की वजह से तकरीबन दो साल तक इस त्योहार के दौरान पाबंदियां लगी रहीं। लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने इस बार दही हांडी मनाने पर छूट दी है। इस बीच त्योहार के आयोजन किए जाने के एलान के बाद से ही शिवसेना के दोनों धड़ों, भाजपा और मनसे ने एलानों की झड़ी लगा दी है। किसी पार्टी ने दही हांडी के विजेता ‘गोविंदा’ के लिए इनामी राशि को 55 लाख रुपये तक पहुंचा दिया है, तो किसी ने विजयी गोविंदा को स्पेन की ट्रिप तक का वादा किया है। 

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर महाराष्ट्र में दही हांडी की यह राजनीति है क्या? दही हांडी को खेल घोषित कराने से महाराष्ट्र सरकार को क्यों फायदा होने की संभावना है? इसके अलावा उद्धव ठाकरे के शिवसेना गुट को उसके गढ़ में घेरने की अलग-अलग पार्टियों की राजनीति क्या है? आइये जानते हैं…
क्या है दही हांडी का खेल? 
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर मनाई जाने वाली जन्माष्टमी पर ही दही हांडी का भी आयोजन होता है। दही हांडी में हिस्सा लेने के लिए रंग-बिरंगे कपड़े पहन कर कुछ युवा हिस्सा लेते हैं। इन्हें ‘गोविंदा’ कहा जाता है। यह गोविंदा मानव पिरामिड बनाकर हवा में लटकी दही से भरी मटकी को फोड़ने की कोशिश करते हैं। इस खेल में हिस्सा लेने वाला जो भी दल मटकी फोड़ता है, उसे अलग-अलग इनाम दिए जाते हैं। 
इसे खेल घोषित करवाने से क्या फायदा?
महाराष्ट्र में यह खेल संस्कृति का हिस्सा है। हालांकि, कुछ और राज्यों में भी दही हांडी के आयोजन किए जाने लगे हैं। अब महाराष्ट्र ने दही हांडी को राज्य में एक एडवेंचर स्पोर्ट का दर्जा देकर लोगों में इसकी दिलचस्पी और बढ़ा दी है। दरअसल, दही हांडी को खेल का दर्जा देने के बाद अब गोविंदाओं को खिलाड़ियों का दर्जा मिल सकता है। यानी यह खिलाड़ी आने वाले समय में किसी अन्य खिलाड़ी की तरह ही स्पोर्ट्स कोटा से सरकारी नौकरी पाने के योग्य हो जाएंगे। 

इतना ही नहीं सरकार दही हांडी में हिस्सा लेने वालों को इंश्योरेंस भी मुहैया करा रही है। किसी खिलाड़ी की जान जाने पर उसके परिवार को 10 लाख रुपये दिए जाएंगे। जबकि गंभीर रूप से घायल हुए गोविंदाओं को सात लाख रुपये और फ्रैक्चर का सामना करने वालों को पांच लाख रुपये मिलेंगे। 
दही हांडी से राजनीति कैसे जुड़ी?
महाराष्ट्र में दही हांडी का केंद्र बना है मुंबई, जो कि पारंपरिक तौर पर शिवसेना का गढ़ बना रहा है। हालांकि, अब शिंदे शिवसेना और ठाकरे शिवसेना के बीच इस शहरी क्षेत्र को अपने कब्जे में लेने की भिड़ंत शुरू हो गई है। दोनों ही कैंपों ने पूरे मुंबई के अलावा ठाणे और कुछ अन्य शहरों में भी पोस्टर-बैनरों का प्रदर्शन किया है। दोनों ही गुटों ने इनमें शिवसेना के दिवंगत सुप्रीमो बाल ठाकरे और एकनाथ शिंदे के राजनीतिक गुरु आनंद दिघे को भी जगह दी है। 
1. शिवसेना के दोनों गुट आमने-सामने
एकनाथ शिंदे के बेटे और कल्याण से सांसद श्रीकांत शिंदे ने तो यहां तक कहा कि वह इन समारोह के जरिए स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे और आनंद दिघे को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। वहीं ठाकरे गुट के सांसद राजन विचारे ने कहा है कि शिवसेना की तरफ से कराए जा रहे कार्यक्रम हिंदुत्व के प्रति पार्टी की एकता, वफादारी और संस्कृति को दिखाता है। 

2. शिंदे के गुट में ठाकरे शिवसेना का दांव
ऐसा नहीं है कि शिंदे गुट ही शिवसेना से उसके शहरी वोटरों को छीनने की कोशिश में जुटा है। ठाकरे गुट भी ठाणे, जो कि एकनाथ शिंदे का गढ़ रहा है, वहां जबरदस्त तरह से दही हांडी का आयोजन करा रहे हैं। ठाणे में दोनों गुट एक-दूसरे से  महज एक किलोमीटर की दूरी पर दही हांडी आयोजित करवा रहे हैं। जहां महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने तेंभी नाका पर दही हांडी का आयोजन करवाया है। इस इलाके में शिवसेना के संस्थापक सदस्य आनंद दिघे ने दही हांडी शुरू करवाया था, शिंदे परिवार उसी प्रथा को आगे बढ़ा रहा है। दूसरी तरफ राजन विचारे (ठाकरे गुट) ने जंभाली नाका पर कार्यक्रम रखा है। 

इस बीच उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे अपने कैंप द्वारा आयोजित दही हांडियों का दौरा करेंगे। सीएम एकनाथ शिंदे भी उन कार्यक्रमों में जाएंगे जिन्हें उनके गुट की तरफ से तय किया गया।

विस्तार

महाराष्ट्र में आखिरकार दही-हांडी को एक ‘खेल’ का दर्जा दे दिया गया है। लेकिन राज्य में राजनीति का खेल अभी थमा नहीं है। खासकर भाजपा-एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना और उद्धव ठाकरे के समर्थन वाली शिवसेना के बीच। इस राजनीति में एंट्री लेने वाला एक और दल महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) भी है। जन्माष्टमी के दौरान खेला जाने वाला दही हांडी लगभग पूरे महाराष्ट्र में प्रचलित है। हालांकि, अगर मौजूदा समय में देखें तो इसे लेकर राजनीति मुंबई में सबसे तेज है। 

कोरोनावायरस महामारी की वजह से तकरीबन दो साल तक इस त्योहार के दौरान पाबंदियां लगी रहीं। लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने इस बार दही हांडी मनाने पर छूट दी है। इस बीच त्योहार के आयोजन किए जाने के एलान के बाद से ही शिवसेना के दोनों धड़ों, भाजपा और मनसे ने एलानों की झड़ी लगा दी है। किसी पार्टी ने दही हांडी के विजेता ‘गोविंदा’ के लिए इनामी राशि को 55 लाख रुपये तक पहुंचा दिया है, तो किसी ने विजयी गोविंदा को स्पेन की ट्रिप तक का वादा किया है। 

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर महाराष्ट्र में दही हांडी की यह राजनीति है क्या? दही हांडी को खेल घोषित कराने से महाराष्ट्र सरकार को क्यों फायदा होने की संभावना है? इसके अलावा उद्धव ठाकरे के शिवसेना गुट को उसके गढ़ में घेरने की अलग-अलग पार्टियों की राजनीति क्या है? आइये जानते हैं…



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