International Yoga Day 2022: योग सिर्फ आसन करना ही नहीं, जानें अष्टांग योग के 8 अंग

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International Yoga Day 2022: योग भारत की ओर पूरी दुनिया को दी गई अनमोल धरोहर है. हजारों वर्ष पहले हमारे ऋषि मुनियों ने योग का आविष्कार किया था और उसके महत्व को पहचाना था. आज दुनियाभर में योग की उपयोगिता को समझा जाने लगा है. यही वजह है कि बीते कुछ सालों में दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने की भी शुरुआत हो चुकी है. हर साल 21 जून को योग दिवस मनाया जाता है. इस दिन दुनियाभर में कई तरह के आयोजन भी किये जाते हैं. आम तौर पर योग को आसन से जोड़कर देखा जाता है. यही वजह है कि सामान्य लोगों की जानकारी भी योग को लेकर आसन तक ही सीमित है.
योग में आसन एक महत्वपूर्ण अंग है लेकिन क्या आप जानते हैं कि योग आसन से कहीं बढ़कर है. आज हम आपको महर्षि पतंजलि द्वारा निर्मित अष्टांग योग के उन 8 अंगों के बारे में जानकारी देंगे जिस पर अष्टांग योग टिका हुआ है. अष्टांग योग ना सिर्फ हमारी भौतिक बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक उन्नति का भी मार्ग प्रशस्त करने में अहम भूमिका निभाता है.

अष्टांग योग के आठ अंग
1. यम – अष्टांग योग का पहला अंग है यम. यम के अंतर्गत पांच महत्वपूर्ण बातें शामिल की गई हैं जिसका पालन आवश्यक माना गया है. इसमें हमेशा सत्य बोलना, अहिंसा का पालन, अस्तेय यानी चोरी ना करना, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह यानी आवश्यकता से अधिक चीजों को संग्रहित ना करने का कहा गया है.

2. नियम – यम की तरह ही नियम में भी पांच महत्वपूर्ण बातों को शामिल किया गया है. इसमें ईश्वर प्राणिधान यानी ईश्वर की उपासना, तप, संतोष, शौच और स्वाध्याय का नियमित पालन करने का कहा गया है.

3. आसन – अष्टांग योग का तीसरा और महत्वपूर्ण अंग है आसन. योग को आमतौर पर आसनों से ही जोड़कर देखा जाता है. जब हम स्थिर अवस्था में बैठकर सुख की अनुभूति करते हैं तो ये आसन कहलाता है. आसन के माध्यम से संपूर्ण बीमारियों का इलाज करने में मदद मिलती है.

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4. प्राणायाम – शरीर को मजबूत बनाने के लिए जिस तरह आसन का प्रयोग किया जाता है उसी तरह मष्तिष्क और मन को मजबूती देने के लिए प्राणायाम किया जाता है. प्राणायाम सांसों की गति को नियंत्रित करने की प्रक्रिया होती है.

5. प्रत्याहार – हमारी समस्त इंद्रियों को सांसारिक विषयों से हटाकर आंतरिक विषयों पर लगाने की प्रक्रिया प्रत्याहार कहलाती है.

6. धारणा – धारणा का व्यापक अर्थ है. इसमें ईश्वर द्वारा निर्मित सभी वस्तुओं को उन्हीं का अंश मानने की भावना ली जाती है. संसार की हर वस्तु को समान समझना धारणा कहलाता है.

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7. ध्यान – अष्टांग योग का सातवां अंग है ध्यान. मन को एकाग्र करने की प्रक्रिया ध्यान कहलाती है. इस प्रक्रिया में आत्मा को परमात्मा से जोड़ने की कोशिश की जाती है.

8. समाधि – अष्टांग योग का आखिरी और आठवां अंग है समाधि. अष्टांग योग में समाधि वो अवस्था है जिसमें क्षुद्र ‘मैं’ का अस्तित्व वृहद ‘मैं’ अर्थात आत्मा का परमात्मा में मिलन हो जाता है. इस स्थिति में मनुष्य को किसी भी चीज का अहसास नहीं होता है. वह परम शांति और परम आनंद की अनुभूति प्राप्त करता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

Tags: Health, International Yoga Day, Lifestyle



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