Havan and Yagya: हवन और यज्ञ में है बड़ा अंतर, इस बात क्या आप जानते हैं? इसे एक समझने की न करें

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Havan and Yagya Difference: वेद और पूजा पद्धतियों में यज्ञ और हवन के महत्व के बारे में बताया गया है. यज्ञ और हवन सनातन हिंदू संस्कृति का अहम हिस्सा है, जिसकी परंपरा सदियों से चली आ रही है. महाभारत और रामायण काल में भी यज्ञ और हवन के प्रसंग मिलते हैं. यज्ञ या हवन ऐसी धार्मिक क्रिया है जिसे आमतौर पर किसी मनोकामना की पूर्ति या अनिष्ट को टालने हेतु कराया जाता है.

यज्ञ और हवन का पौराणिक समय में जितना महत्व था, आज भी उनका भी महत्व है और इसे फलदायी माना गया है. हवन और यज्ञ दोनों ही धार्मिक क्रिया है, लेकिन दोनों में बड़ा अंतर है. इसलिए हवन और यज्ञ को एक समझने की भूल न करें. जानते हैं हवन और यज्ञ के अंतर के बारे में.

क्या है यज्ञ

यज्ञ की परंपरा वैदिक युग से चली आ रही है. संपूर्ण वेदों में यज्ञ का वर्णन मिलता है. धर्म ग्रंथों के अनुसार, यज्ञ की रचना सबसे पहले परमपिता ब्रह्माजी ने की थी. यह किसी पूजा का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान होता है,जिसे गुरु या संत द्वारा अग्नि के चारों और मंत्रों का जाप करते हुए किया जाता है. यज्ञ के लिए प्रज्वलित की जानी वाली अग्नि को यज्ञाग्नि कहा जाता है. यज्ञ को सामान्यता कर्मकांड की विधि कहा जाता है. आमतौर पर यज्ञ, मनोकामना पूर्ति, अनिष्ट को टालने, उर्वरता, वर्षा और युद्धों पर विजय प्राप्ति के लिए कराए जाते हैं.

यज्ञ के बारे में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं- जब प्राणी कर्म करने पर विवश होता है, तब उसे ऐसा कर्म करना चाहिए जैसे कोई यज्ञ कर रहा हो. इस पर अर्जुन श्रीकृष्ण से पूछते हैं  प्रभु यज्ञ क्या है? तब श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं, पार्थ यज्ञ लोक कल्याण के लिए और भगवान की आराधना के लिए भी किया जाता है. हमारा जीवन भी एक यज्ञ के समान है, जिसमें सांसों की आहुति पड़ती है.

क्या है हवन

हवन यज्ञ का ही छोटा रूप है, जिसमें मंत्रोच्चारण के साथ अग्नि में आहुति दी जाती है. हिंदू धर्म में हवन को शुद्धिकरण का एक कर्मकांड कहा जाता है. सरल अर्थ में कुंड में अग्नि के माध्यम से देवता के निटक हवि पहुंचाने की प्रकिया ही हवन कहलाती है. हवन कुंड में अग्नि को प्रज्वलित कर इस पवित्र अग्नि में फल, शहद, घी, लकड़ी आदि पदार्थों की आहुति दी जाती है. मान्यता है कि इससे आसपास मौजूद किसी बुरी शक्ति इत्यादि का प्रभाव दूर हो जाता है. हवन प्रक्रिया से नकारात्मकता से भी मुक्ति मिलती है. शुभकामना, स्वास्थ्य एवं समृद्धि इत्यादि के लिए भी हवन कराने का महत्व है.

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