Happy Birth Day: सौरव गांगुली से सीख सकते हैं ये पांच बड़ी बातें, जिंदगी में हमेशा आएंगी काम

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पूर्व क्रिकेटर सौरभ गांगुली का आज 48वां जन्मदिन है.

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और वर्तमान बीसीसीआई (BCCI) अध्यक्ष सौरव गांगुली (Saurav Ganguly Birthday) का आज 48वां जन्मदिन है.आज हम उनके जीनव की पांच खास बातों को जानेंगे, जिसे सभी को अपनाना चाहिए.

भारतीय क्रिकेट को नई पहचान देने वाले पूर्व कप्तान और वर्तमान बीसीसीआई (BCCI) अध्यक्ष सौरव गांगुली (Saurav Ganguly Birthday) का आज 48वां जन्मदिन है. इस मौके उनके चाहने वाले उनको शुभकामनाएं दे रहे हैं. वहीं आईसीसी ने दादा की एक मैच विनिंग पारी की झलकियों को वीडियो पोस्ट करते हुए उन्हें बर्थडे विश किया है. सौरव गांगुली के जन्म दिन के मौके पर आज हम उनके जीवन की उन खास बातों के बारे में जिन्हें लोगों को अपनी जिंदगी में लागू करना चाहिए. जानते हैं दादा की जिंदगी से जुड़ी पांच खासियत के बारे में…

1. आलोचना से डरें नहीं, सामना करें
साल 2003/04 में भारत ने ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था, जहां आलोचकों ने सीरिज से पहले ही गांगुली की आलोचना शार्ट गेंद के सामने परेशानी को लेकर की थी. लेकिन पहले टेस्ट में गाबा में गांगुली ने 196 गेंदों में 144 रन बनाकर सबको चौंका दिया. भारत ने इतिहास रचते हुए इस सीरिज को 1-1 से बराबर किया था. इसलिए हमें अपने आलोचकों से डरना नहीं चाहिए, और आलोचना को सकारात्मक रूप से लेकर मिले मौके को भुनाना चाहिए.

2. ढीगें हांकने वालों से भयभीत न होना साल 2001 का कोलकाता टेस्ट याद करिए इस मैच में भारत ने फॉलोऑन झेलने के बाद ऑस्ट्रेलिया को हराया था. पहली पारी में वीवीएस लक्ष्मण इकलौते ऐसे बल्लेबाज थे, जो ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के खिलाफ सहज होकर खेल रहे थे. दूसरी पारी में गांगुली ने उन्हें बैटिंग ऑर्डर में तीसरे नंबर पर खेलने के लिए भेजा. सौरव गांगुली ने अपनी कप्तानी में भारतीय टीम में लड़ने का जज्बा पैदा किया. जिससे खिलाड़ियों में जीत हासिल करने का विश्वास जागा. गांगुली के इस अंदाज से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं, जिसमें सबसे अहम है कभी किसी चीज से भयभीत नहीं होना चाहिए.

3. लीडरशिप गांगुली से सीखें
अमेरिकी लेखक टॉम पीटर ने कहा है, ‘लीडर फॉलोवर्स नहीं बनाते हैं, बल्कि वे बहुत से लीडर बनाते हैं.’ गांगुली की कप्तानी में यही चीज देखने को मिली थी, जिससे वह सच्चे लीडर साबित हुए थे. गांगुली की कप्तानी में टीम इंडिया बदलाव के दौर से गुजर रही थी. इस दौरान गांगुली ही थे, जिन्होंने हरभजन सिंह, जहीर खान, वीरेंदर सहवाग, युवराज सिंह और एमएस धोनी जैसे खिलाड़ियों को टीम में शामिल किया और उन्हें विश्व क्रिकेट का लीडर बना दिया. पाकिस्तान के खिलाफ उनके एक निर्णय ने धोनी को साल 2005 में हीरो बना दिया था. धोनी ने अपनी 148 रन की पारी से लोगों का दिल जीत लिया था.

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4. बुरे दौर को चुनौती के रूप में लें
सौरव गांगुली के क्रिकेट करियर का सबसे बड़ा विवाद ग्रेग चैपल से हुआ था. चैपल विवाद से उनके करियर पर काफी फर्क पड़ा था. जॉन राईट के बाद गांगुली की पसंद के ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज ग्रेग चैपल भारत के कोच बने तब उनकी कप्तानी चली गई. बाद में उन्हें टीम से भी बाहर कर दिया गया. इसके बाद गांगुली ने दिलीप ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन किया और टीम में उन्होंने वापसी की. वापसी के बाद गांगुली ने टेस्ट और वनडे मिलाकर 55 मैचों में 3111 रन बनाये. यहां तक की उन्होंने संन्यास भी अपनी शर्तों पर लिया. गांगुली की इस वापसी से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं कि बुरा समय आने के बाद भी वापसी कर शिखर में पहुंचा जा सकता है.

5. हमेशा दिल की सुनते हैं दादा
सौरव गांगुली का 20 साल की उम्र से पहले ही 1992 की बेंसन व हेज वर्ल्ड सीरिज के लिए भारतीय टीम में चयन हो गया था. ब्रिसबेन के मैदान में वेस्टइंडीज के खिलाफ गांगुली ने डेब्यू किया था. ब्रिसबेन की तेज व उछाल लेती हुई विकेट पर गांगुली एंडरसन कमिंस का शिकार हुए थे. चार साल के वनवास के बाद गांगुली ने दोबारा भारतीय टीम में वापसी की. इसके बाद तरक्की करते गए. उन्होंने टीम को मोटिवेट करने के साथ ही सारे फैसले अपने लिए किसी की भी नहीं मानी. यह उनसे सीखने लायक है कि अपने दिल की सुनना चाहिए.





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