Dashami Shradh 2022: पितृ पक्ष का दशमी श्राद्ध है इस दिन, जानें विधि और महत्व

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Dashami Shradh 2022 Date: पितृ पक्ष के दशमी श्राद्ध की ये है विधि.

Dashami Shradh 2022 Date Shubu Muhurat and Vidhi: पितृ पक्ष चल रहा है और इस दौरान पितरों का श्राद्ध, तर्पण, पार्वण और पिंडदान किया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ पक्ष में दशमी श्राद्ध (Dashami Shradh 2022) का खास महत्व होता है. दशमी का श्राद्ध परिवार के उन दिवंगत सदस्यों के लिए किया जाता है, जिनकी मृत्यु दशमी तिथि को हुआ हो. पितृ पक्ष (Pitru Paksha 2022) के श्राद्ध को पार्वण श्राद्ध भी करते हैं. दशमी श्राद्ध (Dashami Shradh Vidhi) को संपन्न करने के लिए कुतुप, रौहिण आदि शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है. पंचांग के अनुसार, इस बार दशमी का श्राद्ध (Dashami Shradh Date) 20 सितंबर 2022 मंगलवार को किया जाएगा. आइए जानते हैं पितृ पक्ष के दशमी श्राद्ध के लिए शुभ मुहूर्त विधि और इसका महत्व. 

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पितृ पक्ष दशमी श्राद्ध 2022 तिथि और शुभ मुहूर्त | Pitru Paksha 2022 Dashmi Shradh Shubh Muhurat

  • दशमी श्राद्ध तिथि- 20 सितंबर, 2022 मंगलवार 
  • कुतुप मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 50 मिनट से 12 बजकर 39 मिनट तक
  • रोहिण मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 39 मिनट से दोपहर 1 बजकर 28 मिनट तक
  • दशमी तिथि आरंभ- 19 सितंबर को शाम 7 बजकर 1 मिनट से
  • दशमी तिथि समाप्त- 20 सितंबर को रात 9 बजकर 26 मिनट पर 

पितृ पक्ष 2022 दशमी श्राद्ध विधि | Pitru Paksh Dashmi Shradh Vidhi

हिंदू पंचांग के अनुसार दशमी श्राद्ध 20 सितंबर, मंगलवार को है. ऐसे में इस दिन सुबह स्नान करने के बाद कुतुप या रौहिण मुहूर्त में पतरों के निमित्त श्राद्ध कर्म, तर्पण या पार्वण-पिंडदान करें. पार्वण श्राद्ध में भोजन को 5 भागों में बांटे. इसे पंचबली भोग कहा जाता है. जिसमें गाय, कुत्ता, कौआ, चींटी, देवता के निमित्त भोजन अलग किया जाता है. फिर इन्हें भोग लगाया जाता है. शास्त्रों के मुताबिक पंचबली भोग के बाद ही दान और ब्राह्मण भोजन की प्रक्रिया शुरू की जाती है.

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दशमी श्राद्ध का महत्व | Dashmi Shradh Importance

शास्त्रों के मुताबिक पितृ पक्ष में दशमी तिथि की श्राद्ध का खास महत्व है. इस दिन उन दिवंगत पितरों का श्राद्ध किया जाता है, जिनका देहावसान दशमी तिथि को हुआ हो. धार्मिक मान्यता है कि दशमी का विधिवत श्राद्ध करने से पितर तृप्त हो जाते हैं और साल भर तक अपने वंशजों पर आशीर्वाद बनाए रखते हैं. मान्यतानुसार, जब पितर देव प्रसन्न रहते हैं तो जीवन की अनेक परेशानियों से मुक्ति मिल जाती है. साथ ही पितरों की पूजा करने से पितृ दोष से भी छुटकारा मिल जाता है. इसके अलावा अगर जन्म कुंडली में पितृ दोष है तो उसका भी निराकरण हो जाता है. कहा जाता है कि जिन जातकों की कुंडली में पितृ दोष बना हुआ है, उन्हें दशमी तिथि का श्राद्ध जरूर करना चाहिए. ताकि पितृ दोष से छुटकारा मिल सके. पितृ दोष से पीड़ित जातकों के जीवन में बराबर कोई ना कोई समस्या आती रहती है. इसके साथ ही धन की कमी और मानसिक परेशानियां भी बनी रहती हैं.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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