ai brain surgery, मिर्गी के दौरे के लिए AI बनेगा हथियार, सर्जरी में भी मिलेगी मदद – artificial intelligence will help in brain disease surgery know how

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नई दिल्ली। पिछले कुछ समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर कई तरह की खबरें सामने आई हैं। दुनिया के सबसे अमीर शख्स इलॉन मस्क ये कह चुके हैं कि अगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, ये मानव सभ्यता के लिए खतरनाक भी साबित हो सकती है। इसके अलावा भी कई ऐसी खबरें आती हैं जिसमें कहा जाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले दौर में लोगों की नौकरियां हड़पने का माद्दा रखता है लेकिन फिलहाल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अच्छे कारणों के चलते सुर्खियों में हैं।

दरअसल, लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में एक इंटरनेशनल टीम ने स्पेशल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रोग्राम बनाया है। इसे मिर्गी के इलाज के लिए काफी कारगर माना जा रहा है। इस एआई को लेकर दावा किया जा रहा है कि ये दिमाग की बारीक से बारीक विसंगतियों का पता लगा सकता है और इसके चलते मिर्गी के जटिल इलाज को आसान बनाया जा सकता है।

इस प्रोग्राम का प्रयोग मल्टीसेंटर एपिलेप्सी लीशन डिटेक्शन प्रोजेक्ट में किया गया है। इस प्रोग्राम को 22 इंटरनेशनल एपिलेप्सी सेंटर्स के हजार से अधिक मरीजों के एमआरआई के विश्लेषण के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें ड्रग प्रतिरोधी फोकल कार्टिकल डिस्प्लालिया (एफसीडी) में होने वाली विसंगतियों के स्थान की रिपोर्ट मिली है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एफसीडी, मिर्गी रोग का प्रमुख कारण है और दिमाग में एफसीडी का होना, ड्रग प्रतिरोधी मिर्गी का कारण बनता है।

इसके इलाज के लिए यूं तो सर्जरी की प्रक्रिया को अपनाया जाता है लेकिन एमआरआई पर घावों का पता लगाना डॉक्टरों के लिए एक बड़ा चैलेंज साबित होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि एफसीडी के लिए एमआरआई स्कैन काफी सामान्य दिखाई दे सकता है। रिसर्चर्स ने ब्रेन में तीन लाख से ज्यादा जगहों पर जांच कर एमआरआई स्कैन से कार्टिकल गुणों को आकलित करने का प्रयास किया है।

इस रिसर्च का मकसद ये पता लगाना था कि मस्तिष्क की सतह कितनी मुड़ी हुई होती है। इसके आधार पर ही रेडियोलॉजिस्ट्स ये फैसला करते हैं कि दिमाग स्वस्थ है या उसमें एफसीडी है। ब्रेन जर्नल में इस शोध के निष्कर्ष को प्रकाशित किया गया है। इस रिसर्च में 538 लोग शामिल हुए थे और इस रिसर्च में 67 प्रतिशत लोगों का एफसीडी का पता लगाया जा सका था।

गौरतलब है कि इससे पहले तक रेडियोलॉजिस्ट्स एमआरआई के आधार पर 178 लोगों के दिमाग में विसंगतियों का पता लगा पाने में नाकाम रहे थे। यूसीएल ग्रेट ओरमंड स्ट्रीट इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ के रिसर्चर मथिल्डे रिपार्ट ने कहा है कि उन्होंने इस एआई सिस्टम को विकसित करने में एक बात पर काफी फोकस किया है। उन्होंने कहा कि वे चाहते थे कि इसके सहारे डॉक्टर को सही फैसला लेने में मदद मिल सके।

इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अहम बात ये थी कि एमईएलडी एल्गोरिद्म किस हिसाब से बीमारी का अंदाजा लगा पाने के काबिल हो सकता है। ये इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि यदि डॉक्टर ब्रेन के स्कैन से विसंगतियों की पहचान कर सकें तो उसे हटाने के लिए सटीक सर्जरी करना आसान हो जाएगा।



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