‘हाथी’ के बच्चे की 30 हजार साल पुरानी ममी मिली: गुफा में शेरों के साथ रहता था बच्चा, आंखें, सूंड़; खुर सब सुरक्षित

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नई दिल्ली6 मिनट पहले

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कनाडा के पुरातत्वविदों को सोने की खदान में 30 हजार साल पुराने जीव मैमथ के बच्चे के अवशेष मिले हैं। हाथी के पूर्वज कहे जाने वाले Mammoth उस समय अस्तित्व में थे, जब पृथ्वी बर्फ से ढकी हुई थी। उस काल को आइस एज कहा जाता है।

मैमथ के फीमेल बच्चे के अवशेष पूरी तरह सुरक्षित है। हजारों साल तक दबे होने के बाद उसका शरीर किसी ममी जैसा हो गया है। मैमथ के शरीर के बाल अभी भी हैं। कनाडा के पुरातत्वविदों को चकित हैं कि आखिर 30 हजार साल पहले जिस मैमथ के बच्चे की मौत हुई उसका शरीर आज भी सुरक्षित कैसे है।

मैमथ का बच्चा अबतक की बड़ी खोज
कनाडा की Klondike gold fields में मिला यह मैमथ का बच्चा अब तक की सबसे बड़ी खोज मानी जा रही है। वैज्ञानिकों ने मैमथ के बच्चे का नामकरण भी किया है। उसे कॉफ चोगा नाम दिया है जिसका अर्थ बिग बेबी एनिमल होता है। पुरातत्वविदों का कहना है कि इस बेबी मैमथ का शरीर पूरी तरह सुरक्षित है जो स्किन और उसके बालों से ढका हुआ है। उसके अवशेष को देखकर लगता है कि जैसे किसी ने उसकी ममी बनाई होगी और उसे दफनाया होगा।

गुफा में शेरों के साथ रहता था मैमथ
कनाडा के पर्यटन और संस्कृति मंत्री रंज पिल्लै ने एक बयान में कहा, ‘युकोन हमेशा से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आइस एज और बेरिंगिया रिसर्च के लिए जाना जाता है।’

जांच में सामने आया है कि यह मैमथ मादा है और जंगली घोड़ों, गुफा शेर और विशाल स्टेपी बाइसन के साथ रहती थी जो युकोन में हजारों साल पहले मौजूद थे।

जांच में सामने आया है कि यह मैमथ मादा है और जंगली घोड़ों, गुफा शेर और विशाल स्टेपी बाइसन के साथ रहती थी जो युकोन में हजारों साल पहले मौजूद थे।

मंत्री ने कहा, ‘युकोन सरकार और माइन में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच साझेदारी के बिना इस तरह की खोज संभव नहीं हो सकती।’ चोगा की दोनों आंखें बंद हैं। उसका मजबूत सूंड़ अब कमजोर हो चुका है। मैमथ के बेहद अच्छी तरह संरक्षित शरीर ने विशेषज्ञों को चौंका दिया है। इसके खुरों में अभी भी खांचे बरकरार हैं और आज भी उसकी त्वचा किसी जीवित जानवर जैसी है।

मैमथ हाथी पर चल रही है रिसर्च
लुप्त जानवरों के जो अवशेष मिलते हैं, उनके जीन की एडिटिंग करके वैज्ञानिकों ने उन जानवरों के जैसा नया जानवर बनाने के प्रोजेक्ट पर काम कई साल पहले शुरू कर दिया है। करीब दो साल पहले प्रसिद्ध कारोबारी बेन लैम और हावर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक जॉर्ज इस प्रोजेक्ट पर काम कर चुके हैं।

मैमथ की ममी लगभग 30 हजार साल पुरानी
रिसर्चर्स का कहना है कि यह ममी करीब 30 हजार साल पुरानी है। उस वक्त यह दिखने में बिलकुल हाथियों की तरह होते थे लेकिन काफी बड़े आकर के थे। जिनकी खाल बालों से ढकी होती थी जो इन्हें ठंड से बचाए रखती थी। इससे पहले साल 1948 में नार्थ अमेरिका में भी एक मैमथ के अवशेष मिले थे जिसका नाम एफी रखा गया था।

मिस्र की रानी क्लियोपैट्रा की ममी में सोने की जीभ
मिस्र अपने पिरामिडों के लिए मशहूर है, जहां कई ममियां मिल चुकी हैं। मिस्र में एक खास तरह की ममी काफी चर्चा में आयी थी। इस ममी में सोने की जीभ लगी थी। उस समय यह ममी दुनिया भर में चर्चा का विषय थी।

ये ममी मिस्र के टॉलमी साम्राज्य की चर्चित रानी क्लियोपेट्रा (Queen Cleopatra)की है। इस ममी को मिस्र के ताप सिरिस मैग्ना से निकाला गया। जो करीब 2 हजार साल पुरानी बताई जा रही थी।

ये ममी मिस्र के टॉलमी साम्राज्य की चर्चित रानी क्लियोपेट्रा (Queen Cleopatra)की है। इस ममी को मिस्र के ताप सिरिस मैग्ना से निकाला गया। जो करीब 2 हजार साल पुरानी बताई जा रही थी।

पुरातत्व विभाग की जांच जारी
ममी के बारे में यह भी कहा जा रहा था कि मौत के बाद देवता से बात करने के लिए उनकी जुबान काटकर सोने की कर दी गई होगी। हालांकि इस तथ्य का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। वहीं इस ममी के मिलने के बाद पुरातत्व विभाग इसकी जांच कर रहा है। खुदाई के दौरान 16 ममियां मिली थीं। उनमें से एक की जीभ सोने की थी। देवताओं की इस देश में बड़ी मान्यता यहां कई तरह के देवता है। इनमें पाताल लोक के देवता की भी पूजा की जाती है। उन्हीं से बात करने के लिए लोग सोने की जीभ का इस्तेमाल करते थे। इजिप्शियन एंटीक्वीटीज मिनिस्ट्री ने कहा कि अभी तक ये साफ नहीं है कि आखिर इस ममी की जीभ सोने की क्यों लगाई गई।

ममी के रहस्य से हैरान रहे वैज्ञानिक
चीन के ताइजाउ के पास जियांगसू प्रांत में ये ममी मिली थी। 700 पुरानी ममी होने के बाद भी वो जरा नहीं बदली थी। उसकी बॉडी वैसी ही थी जैसी रही होगी। उसके बाल, भौंए, चेहरा और स्किन सब कुछ वैसा का वैसा। ऐसा कैसे हो पाया, पता नहीं। उसके संरक्षण के तरीके को देखकर वैज्ञानिक हैरत में पड़ गए कि सालों पहले ममीज को दफन करने का सही आइडिया क्या रहा होगा। बताया गया कि ये ममी मिंग डायनेस्टी के किसी अमीर औरत की थी।

कहां से शुरू हुआ ममी का कॉन्सेप्ट
प्राचीन मिस्र में शव पर लेप को लगाने को एक बेहद पवित्र कला माना जाता था और इसकी जानकारी केवल कुछ ही लोगों तक सीमित थी। इस कला के बारे में ज्यादातर गुप्त बातें केवल कुछ ही लोगों तक सीमित थी। यह कला एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को ज्यादातर जुबानी तरीके से सिखाई जाती थी। मिस्र मामले के विशेषज्ञों का मानना है कि शव पर लेप लगाए जाने के बारे में लिखित में कोई सबूत नहीं मिले हैं। अब तक केवल दो ऐसी किताबें मिली हैं जिनमें मिस्र में शवों को लेप लगाकर ममी बनाने के बारे में जानकारी देने वाला माना जाता है।

अब पुरातत्वविदों को भोजपत्र की शक्ल में मौजूद एक ऐसी मेडिकल बुक को पढ़ने में सफलता मिली है जिसमें ममी बनाने की पूरी प्रक्रिया को समझाया गया है। इस किताब में हर्बल मेडिसिन और त्वचा के सूजन के बारे में जानकारी दी गई है। इस किताब को हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन में मिस्र मामलों की विशेषज्ञ सोफी चिओड्ट ने संपादित किया है। यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन ने एक बयान जारी करके कहा कि इस भोजपत्र में सबसे पहले इस्तेमाल किए जाने वाले हर्बल इलाज के बारे में जानकारी है।

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