हत्या दोष में 1.5 साल से सजा काट रहे मिट्ठू हाथी की रिहाई का रास्ता साफ, भेजा जाएगा दुधवा नेशनल पार्क

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विशांत श्रीवास्तव /वाराणसी: वाराणसी के रामनगर वन्यजीव संरक्षण केंद्र में हाथी ‘मिट्ठू’ करीब डेढ़ सालों से हत्या के जुर्म में सजा काट रहा है. मिट्ठू की रिहाई को लेकर वाराणसी (Varanasi) के पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश ने पहल की थी, जिसका परिणाम अब सामने आया है. मिट्ठू को जल्द ही पैरोल पर रिहाई मिल जाएगी. इसके बाद वह दुधवा नेशनल पार्क के खुले जंगलों में खुला घूम सकेगा.

बता दें कि 20 अक्टूबर 2020 को रामनगर की रामलीला चल रही थी. महावत के साथ मिट्ठू भी मेले में गया था. मेले से वापस लौटते वक्त कुछ लोगों ने मिट्ठू के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी. इस बात से गुस्साए मिट्ठू ने एक व्यक्ति को जान से मार दिया था. 

क्या है पूरा मामला?
डीएफओ चंदौली दिनेश सिंह ने बताया कि काशी वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत बबुरी थाने में मिट्ठू ने एक व्यक्ति को मार दिया गया था. सूचना मिलने पर हाथी और उसके महावत को कस्टडी में लिया गया. प्रारंभिक तौर पर जांच के दरमियान महावत ने जो पेपर प्रस्तुत किए थे उसमें हाथी खरीदने के बारे में लिखा हुआ था.

वहीं, जब चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन की तरफ से जांच की गई तो वह पेपर गलत पाया गया. आरोप था कि वह हाथी को अवैध तरीके से उसे पाल रहे थे. इसके साथ ही संबंधित आरोपियों के खिलाफ वाइल्डलाइफ 1972 की धारा के अंतर्गत कार्रवाई की गई थी. इसके अलावा हाथी और उसके महावत पर हत्या (आईपीसी की धारा 302) का मुकदमा दर्ज किया गया. इसके बाद हाथी को सीज कर लिया गया था. इस मामले में महावत को जमानत मिल गई थी, लेकिन मिट्ठू आज तक सजा काट रहा है. 

हाई कोर्ट में मामला है विचाराधीन 
डीएफओ ने बताया कि महावत द्वारा हाथी को छुड़ाने के लिए सीजीएम कोर्ट में एप्लीकेशन डाली गई थी, जो कि खारिज हो गई. उसके बाद डीजे कोर्ट में कोशिश की गई, वह भी एप्लीकेशन खारिज हो गई. उसके बाद हाथी मालिक ने हाईकोर्ट में अपील की, जो अभी विचाराधीन है. लॉकडाउन की वजह से केस की सुनवाई नहीं हो पा रही है. 

लॉकडाउन खत्म होते ही दुधवा जाएगा मिट्ठू
डीएफओ ने कहा कि इसी बीच हम लोग द्वारा प्रयास करके CJM न्यायालय से हाथी को दुधवा नेशनल पार्क भेजने के लिए अनुमति ले ली गई है. विभागीय अनुमति मिल गई है. लॉकडाउन खत्म होते ही हाथी को सही सलामत दुधवा नेशनल पार्क ले जाएंगे. उन्होंने बताया कि जब तक केस चल रहा है, हाथी वन विभाग की अभिरक्षा में वहीं रहेगा. दुधवा नेशनल पार्क में अन्य हाथियों के साथ रहेगा. आगे जो भी फैसला न्यायालय द्वारा होगा उसका पालन किया जाएगा. 

वाराणसी कमिश्नर ने रिहाई को लेकर की थी पहल
बता दें कि मिट्ठू फिलहाल चंदौली के एक बाग में बने एक अस्थायी जेल में सजा काट रहा है. डेढ़ साल से बेड़ियों में जकड़े रहने के कारण वह ना तो सही से बैठ पाता है और ना ही चल-फिर पाता है. इस बात का पता जब वाराणसी के कमिश्नर को लगा तो उन्होंने नई दिल्ली चिड़ियाघर के डायरेक्टर रमेश पांडेय पैरोल पर रिहाई को लेकर बातचीत की. ऐसे में अब मिट्ठू जल्द की रिहा होकर दुधवा नेशनल पार्क जाएगा. 

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