सिद्धार्थ शुक्ला की मौत ने युवाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों को किया जाहिर

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Sidharth Shukla Death: लंबे समय से माना जाता रहा है कि हार्ट अटैक सिर्फ वरिष्ठ लोगों को आ सकता है. उम्र को करीब हमेशा दिल से जुड़ी बीमारियों का सबसे बड़ा जोखिम फैक्टर समझा गया. लेकिन, ऐसा लगता है कि ये अब सच नहीं रहा क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से युवाओं में कार्डिअक अरेस्ट में बढ़ोतरी देखी गई है. इसका ताजा उदाहरण है 40 वर्षीय बिग बॉस 13 के विजेता सिद्धार्थ शुक्ला की अचानक मौत.

बालिका वधु, झलक दिखला जा जैसे लोकप्रिय शो और हाल ही में बिग बॉस से शुक्ला ने कामयाब और सफल एक्टर का खिताब पाया था. हाल के दिनों में कई ऐसे मशहूर लोग रहे हैं जिनकी मौत हार्ट अटैक से हुई. 49 वर्षीय फिल्ममेकर और मंदिरा बेदी के पति राज कौशल और 47 वर्षीय एक्टर अमित मिस्त्री हार्ट अटैक से मरनेवालों में शामिल हैं.

दिल से जुड़ी मौतों की संख्या में बढ़ोतरी ने दुनिया भर में चिंता की लहर पैदा कर दी है. आंकड़े इसकी गवाही देते हैं. 2018 में किए गए रिसर्च से पता चलता है कि 35 से 54 वर्ष के मरीजों में हार्ट अटैक की दर 27 फीसद से बढ़कर 32 फीसद हो गई है. मौत के बढ़ते आंकड़े क्या हमारे लिए परेशानी का कारण हैं, क्योंकि उम्र अब कोई रुकावट नहीं रही? क्या कोई उपाय है जिसको शुरुआती उम्र में हम दिल से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम के लिए कर सकते हैं?

हमारी लाइफस्टाइल तो कहीं जिम्मेदार नहीं?
हमारी प्राथमिकताएं पहले की प्राथमिकताओं से बिल्कुल अलग हो गई हैं. हम पैकेट वाला खाना खाते हैं, पार्टी ऐसी करते हैं जैसे कल नहीं होनेवाला, और प्राकृतिक नियमों के विरुद्ध जाकर हम नींद लेते हैं. कोरोना महामारी ने हमारे मामले को और बदतर कर दिया है. इसका मतलब हुआ कि हम हर समय बहुत अधिक तनाव का अनुभव करते हैं. गतिशीलता की कमी हो गई है, और पहले से कहीं ज्यादा हम सुस्त हो गए हैं! दुर्भाग्य से ये हमारी जिंदगी में अंधेरा और उदासी को आमंत्रित करने का उपयुक्त तरीका है. उसके नतीजे में हमारी सेहत को कीमत चुकानी पड़ती है.

गुरुग्राम में कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर शिक्षा परिजत ने कहा, “युवाओं के बीच हार्ट अटैक में बढ़ोतरी के अन्य कारणों में से एक टाइप 2 डायबिटीज की बढ़ती घटना है. मोटापा, सुस्त लाइफस्टाइल और खानपान की अनुचित आदतों का बहुत बड़ा योगदान है. 20 साल पहले, हार्ट अटैक ज्यादातर बुजुर्गों को आते थे. आज उम्र की सीमा नहीं रही.” ज्यादा चिंताजनक बात ये है कि ये आदतें आज बच्चों की जिंदगी का अहम हिस्सा हैं, जिसका मतलब है कि शुरुआती उम्र में ही चक्र को तोड़े जाने की जरूरत है.

हार्ट अटैक के जोखिम को कैसे आप जानेंगे?
डॉक्टर परिजत के मुताबिक, “निश्चित रूप से, हार्ट अटैक विभिन्न आयु ग्रुप के लोगों में हो सकता है. लेकिन अगर, ये आपके जीन में है, तो उसकी संभावना स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है. ऐसी परिस्थितियों में, प्राथमिक रोकथाम आवश्यक हो जाता है. परिवार के सबसे करीबी 65 वर्षीय रिश्तेदार में हार्ट अटैक या स्ट्रोक की हिस्ट्री होने पर आपको दोहरा सावधान रहना चाहिए.” भले ही आप पर इसका जोखिम कारक लागू नहीं होता है, मगर 20-39 साल की उम्र होने पर दिल की सेहत का आकलन हर चार से छह साल पर कराने को सुनिश्चित करें.

इलाज से बेहतर रोकथाम है 
कार्डियो-वैस्कुलर रोग के जोखिम को कम करने के लिए प्राथमिक रोकथाम बुनियाद है. मोटापा, खराब डाइट, व्यायाम की कमी, टाइप 2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रोल पर नियंत्रण रखने के लिए ये जरूरी है. स्मोकिंग और अत्यधिक अल्कोहल के इस्तेमाल जैसी आदतों को छोड़ना भी सुनिश्चित करें. उम्र के शुरुआत में ही अच्छी आदतों को जिंदगी का हिस्सा बनाएं. बच्चों को सेहतमंद जिंदगी गुजारने के तरीके भी सिखाए जाएं.

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