सावधान! आपका सैनिटाइजर हो सकता है जहरीला, पहली बार CBI ने जारी किया अलर्ट

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नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Coronavirus) से बचाव के लिए ज्यादातर डॉक्टर हैंड सैनिटिजर (Hand Sanitizer) इस्तेमाल करने की सलाह दे रहे हैं. लेकिन यही करने वाला सैनिटाइजर आपके बचाव की जगह खतरनाक साबित हो सकता है. सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन (CBI) ने पहली बार अलर्ट जारी कर कहा है कि देश में ऐसे सैनिटाइजर भी बिक रहे हैं जो खतरनाक विषैले हैं. इससे लोगों की जान को खतरा हो सकता है.

सैनिटाइजर में हो रहा है मेथानॉल का इस्तेमाल
सीबीआई ने इंटरपोल से मिली जानकारी के आधार पर देश भर में पुलिस और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को सतर्क किया है कि कई गिरोह काफी विषैले मेथानॉल के प्रयोग से बने हैंड सेनिटाइजर बेच रहे हैं और एक अन्य तरह का गिरोह भी काम कर रहा है जो खुद को पीपीई और कोविड-19 से जुड़े मेडिकल आपूर्तिकर्ता बताता है. यह जानकारी सोमवार को अधिकारियों ने दी.

काफी खतरनाक है ऐसे सैनिटाइजर का इस्तेमाल
अधिकारियों ने बताया कि वैश्विक पुलिस सहयोग एजेंसी इंटरपोल ने जानकारी दी है कि मेथानॉल का इस्तेमाल कर फर्जी हैंड सेनिटाइजर बनाया जा रहा है. मेथानॉल काफी विषैला पदार्थ होता है. उन्होंने कहा कि कोविड-19 के दौरान जहरीले हैंड सेनिटाइजर के इस्तेमाल के बारे में दूसरे देशों से भी सूचनाएं प्राप्त हुई हैं. एक अधिकारी ने बताया, ‘मेथानॉल काफी विषैला हो सकते हैं और मानव शरीर के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं.’

धोखाधड़ी के भी आ रहे हैं नए मामले
अधिकारियों ने कहा कि इंटरपोल से सूचना मिलते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने तुरंत पुलिस अधिकारियों को सतर्क किया कि गिरोह को लेकर सतर्क रहें जो इस तरीके से तुरंत धनोपार्जन में लगे हुए हैं. इंटरपोल का मुख्यालय लॉयन में है और भारत में उसके साथ समन्वय करने की जिम्मेदारी सीबीआई के पास है.

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उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी की चपेट में पूरी दुनिया के आने और विश्व की अर्थव्यवस्था घुटनों के बल आने के बीच कई संगठित आपराधिक समूह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभर आए हैं जो अवैध गतिविधियों से धन कमा रहे हैं और कोविड-19 उपकरणों की कंपनियों के प्रतिनिधि बनकर ठगी कर रहे हैं.

एजेंसी के सूत्रों ने कहा कि कुछ अपराधी पीपीई किट और कोविड-19 से जुड़े उपकरणों के निर्माता के प्रतिनिधि बनकर अस्पतालों और स्वास्थ्य अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं. इस तरह के सामान की कमी का लाभ उठाते हुए वे अधिकारियों और अस्पतालों से ऑनलाइन अग्रिम भुगतान हासिल कर लेते हैं लेकिन पैसे लेने के बाद वे सामान की आपर्ति नहीं करते हैं.

 





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