शेख हसीना का राष्ट्रपति कोविंद-पीएम मोदी को गिफ्ट: बांग्लादेशी प्रधानमंत्री ने भेजे एक मीट्रिक टन आम्रपाली आम, भारत को बता चुकी हैं अच्छा पड़ोसी

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नई दिल्ली3 घंटे पहले

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बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारत के पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक मीट्रिक टन आम्रपाली आम भेजे। बांग्लादेश हाई कमीशन की ओर से यह जानकारी दी गई। कमीशन के मुताबिक, पिछले ट्रेडिशन मैंगो-हिलसा डिप्लोमेसी को जारी रखते हुए हसीना ने यह अनोखा उपहार पीएम मोदी और राष्ट्रपति कोविंद को भेजा है। बता दें कि 2021 में भारत ने कोरोना की दवाई बांग्लादेश भेजी थी, जिसके बाद हसीना ने भारत को अपना अच्छा पड़ोसी बताया था।

बांग्लादेशी पीएम ने पिछले साल भी कोविंद, मोदी और पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और असम के मुख्यमंत्रियों को उपहार के तौर पर 2600 किलोग्राम आम भेजे थे। ये आम बांग्लादेश की रंगपुर जिले की हरिभंगा किस्म के थे। इन आमों का बेनापाल चेकपोस्ट से भारत भेजा गया था।

बांग्लादेशी पीएम भारत को बता चुकी हैं अच्छा पड़ोसी
कोविड महमारी के दौरान भारत ने बांग्लादेश को दवाइयां भेजी थी। जिसके बाद पीएम हसीना ने भारत और पीएम मोदी का शुक्रिया अदा किया था। तब हसीना ने भारत को अपना अच्छा पड़ोसी बताया था। उन्होंने पीएम मोदी का शुक्रिया अदा करते हुए कहा था- ये अच्छे पड़ोसी की डिप्लोमेसी का रोल मॉडल है।

मैंगो डिप्लोमेसी एशिया महाद्वीप में राजनीति का हिस्सा
बांग्लादेश के अलावा भारत की पाकिस्तान और चीन के साथ भी मैंगो डिप्लोमेसी रही है। एक समय ऐसा में पाकिस्तान के तरफ से भी भारत को उपहार के तौर पर आम भेजा जाता था। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ पाकिस्तान के उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने भारत को तोहफे में आम भेजे थे।

देखा जाए तो मैंगो डिप्लोमेसी एशिया महाद्वीप में राजनीति का हिस्सा रह चुकी हैा पिछले साल पाकिस्तान ने कई देशों को आम भेजे, लेकिन किसी भी देश ने उसके आम को तबज्जो नहीं दी। यहां तक की चीन और अमेरिका ने पाकिस्तान के आम को लेने से ही इनकार कर दिया था।

1971 में शुरू की गई एक विशेष प्रकार की खेती
आम की बात करें तो आम्रपाली आम 1971 में शुरू की गई एक विशेष प्रकार की खेती है। इसी साल बांग्लादेश पाकिस्तान से टूटकर अलग देश बना था। उसी साल डॉ पीयूष कांति मजूमदार ने इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट (IARI) में इस आम को दशेरी’ और ‘नीलम’ की एक संकर किस्म के रूप में विकसित किया था। तब से इस आम को पूरे भारत में खेतों और बागों में पेश किया गया है।

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