राष्ट्रमंडल खेलों में कुछ ऐसा रहा है भारत का सफर, जानिए CWG 2022 में किन गेम्स में भारत जीत सकता है मेडल

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राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन जब भी ब्रिटिश धरती पर किया गया, तब भारतीय खिलाड़ियों ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और उम्मीद की जा रही है कि निशानेबाजी खेल शामिल नहीं किये जाने के बावजूद बर्मिंघम में 28 जुलाई से शुरू होने वाले खेलों में भी वे नये रिकॉर्ड स्थापित करेंगे। 12 दिनों तक चलने वाले इस टूर्नामेंट का समापन 8 अगस्त को होगा। इस साल भारत के कुल 214 खिलाड़ी भाग लेंगे। बात राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास की करें तो इसका पहला संस्करण 1930 में खेला गया था, जिसमें भारत ने भाग नहीं लिया था। भारत ने पहली बार 1934 राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लिया था जहां 1 मेडन झोली में आया था। अब तक कुल राष्ट्रमंडल खेलों के 21 संस्करण हो चुके हैं जिसमें भारत ने 1930, 1950, 1962 और 1986 में चार बार हिस्सा नहीं लिया। 

पिछले सीजन कैसा रहा था टीम इंडिया का प्रदर्शन

2018 में कॉमनवेल्थ का पिछला संस्करण अमेरिका में खेला गया था। इस दौरान भारत ने 26 गोल्ड के साथ 20 सिल्वर और इतने ही ब्रॉन्ज मेडल के साथ कुल 66 पदक अपने नाम किए थे। पदकों की सूची में भारत ऑस्ट्रेलिया (198) और इंग्लैंड (136) के बाद तीसरे पायदान पर रहा था।

राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने जीते 503 मेडल

राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने अब तक कुल 503 मेडल जीते हैं जिसमें टीम इंडिया का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में आया था जिसकी मेजबानी दिल्ली को मिली थी। भारत इस दौरान 101 मेडल के साथ दूसरे पायदान पर रहा था। भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में अभी तक 181 गोल्ड, 173 सिल्वर और 149 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। भारत राष्ट्रमंडल खेलों में केवल दो बार खाली हाथ लौटा है जिसमें 1938 (सिडनी) और 1954 (वैंकुवर) खेल शामिल हैं।

इन 3 खेलों में मजबूत रहा है भारत

राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रदर्शन शूटिंग, वेटलिफ्टिंग और रेस्लिंग में शानदार रहा है। अब तक शूटिंग में भारत 63 गोल्ड के साथ 135 पदक, वेटलिफ्टिंग में 43 गोल्ड के साथ 125 पदक और रेस्लिंग में 43 गोल्ड के साथ 102 पदक जीत चुका है। 503 में से 362 मेडल तो भारत ने इन्हीं तीन खेलों में जीते हैं।

शूटिंग के न होने से भारत को घाटा

बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में शूटिंग को शामिल नहीं किया गया है। इसकी वजह संसाधनों की कमी बताई जा रही है। शूटिंग कॉमनवेल्थ गेम्स में ऑप्शनल स्पोर्ट की लिस्ट में है। भारत ने शूटिंग में हमेशा अच्छा किया है, लेकिन इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में शूटिंग का ऑप्शनल स्पोर्ट की लिस्ट में होने से भारत को नुकसान होगा। 2018 में भारतीय टीम ने कुल 16 मेडल अपने नाम किए थे और मेडल टैली में भारत को तीसरे स्थान तक पहुंचाया था।

नीरज के बाहर होने के बाद भी ट्रैक एवं फील्ड से पदक की उम्मीद

राष्ट्रमंडल खेलों में सभी की निगाहें ओलंपिक चैम्पियन नीरज चोपड़ा के प्रदर्शन पर रहती, लेकिन विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाले नीरज चोपड़ा ग्रोइन इंजरी के कारण राष्ट्रमंडल खेलों 2022 से बाहर हो गए हैं। कई विश्व स्तरीय खिलाड़ियों के आने से भारत 28 जुलाई से आठ अगस्त तक चलने वाले खेलों में आधा दर्जन पदकों की उम्मीद लगाये होगा। देश का एथलेटिक्स में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिल्ली 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में रहा है जिसमें दो स्वर्ण, तीन रजत और सात कांस्य पदक ट्रैक एवं फील्ड स्पर्धा के खाते में रहे थे। उस प्रदर्शन की बराबरी करना हालांकि निश्चित रूप से मुश्किल होगा लेकिन भारतीय अपना दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश में होंगे।

मुक्केबाजी में पंघल और लवलीना होंगे दावेदार

भारतीय मुक्केबाज जब राष्ट्रमंडल खेलों में रिंग पर उतरेंगे तो अमित पंघल टोक्यो ओलंपिक खेलों की निराशा, जबकि लवलीना बोरगोहेन विश्व चैंपियनशिप के लचर प्रदर्शन को भुलाकर वापसी करने की कोशिश करेंगे। मौजूदा विश्व चैंपियन निखत जरीन पर भी सभी की निगाहें टिकी रहेंगी जो अपना स्वर्णिम अभियान जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी तरह से अनुभवी शिव थापा (63.5 किग्रा) भी अपने नाम पर राष्ट्रमंडल खेलों का पदक दर्ज करना चाहेंगे।

भारतीय टेबल टेनिस टीम के पास बड़ा मौका

पिछली बार गोल्ड कोस्ट में नई ऊंचाइयां हासिल करने वाली भारतीय टेबल टेनिस टीम यदि बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में 2018 की बराबरी भी कर लेती है तो यह उसके लिए बड़ी उपलब्धि होगी। भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन करते हुए तीन स्वर्ण, दो रजत और तीन कांस्य पदक जीते थे। शरत और मनिका के अलावा साथियान भी पुरुष युगल और मिश्रित युगल में स्वर्ण पदक के दावेदार हैं।

बैडमिंटन में पीवी सिंधू से गोल्ड की उम्मीद

दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु महिला वर्ग में गोल्ड मेडल जीतने की दावेदार हैं। दूसरी ओर पुरुष टीम में 2021 विश्व चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता किदांबी श्रीकांत, कांस्य पदक विजेता लक्ष्य सेन, बी सुमीत रेड्डी और चिराग शेट्टी और सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी की स्टार युगल जोड़ी शामिल होगी। गोल्ड कोस्ट की बात करें तो भारत ने मिश्रित टीम का पहला स्वर्ण पदक जीता और 2 स्वर्ण, 3 रजत और 1 कांस्य पदक सहित कुल 6 पदक जीते थे। 

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हॉकी में पुरुष टीम है दावेदार 

हॉकी में भारतीय पुरुष टीम ने हाल में अच्छा प्रदर्शन किया है। टीम ने ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था, तो वहीं महिला टीम चौथे नंबर पर रही थी। मनप्रीत की अगुवाई में भारतीय टीम गोल्ड मेडल जीतने की भरपूर कोशिश करेगी। महिला टीम हाल में खराब दौर से गुजर रही है। महिला हॉकी वर्ल्ड कप में टीम का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। भारतीय महिला टीम का 2002 में स्वर्ण पदक के साथ राष्ट्रमंडल खेलों में एक अच्छा ट्रैक रिकॉर्ड है। 2018 गोल्ड कोस्ट खेलों में भारत की महिला टीम चौथे स्थान पर रही।

भारतीय भारोत्तोलन टीम में चानू पर होंगी नजरें 

भारत राष्ट्रमंडल स्तर पर इस खेल में महाशक्ति है। 2018 में भारतीयों ने पांच स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य से कुल नौ पदक हासिल किये थे। टीम में तोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई चानू भी शामिल हैं। चानू के अलावा मौजूदा जूनियर विश्व चैम्पियन हर्षदा गरूड़ और राष्ट्रमंडल खेलों की टीम में शामिल भारोत्तोलकों के साथ एशियाई चैम्पियन झिली डालाबेहड़ा भी इसमें शिरकत करेंगी।

राशिद अनवर ने जिताया था भारत को सबसे पहला मेडल 

रेस्लर राशिद अनवर ने भारत को सबसे पहला मेडल डेब्यू सीजन 1934 में जिताया था। उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत का खाता खोला था। उस दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स को ब्रिटिश एम्पायर गेम्स कहा जाता था।

आजादी के बाद भारत ने पहली बार 1954 में लिया हिस्सा

भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों में पहली बार हिस्सा 1954 में लिया था, उस साल भारत की झोली में एक भी मेडल नहीं आया था। 1966 में पहली बार भारत पदकों की सूची में दहाई का आंकड़ा छूने में कामयाब रहा। उस दौरान भारत की झोली में कुल 10 मेडल आए इसके बाद लगातार भारत के पदकों में इजाफा होता रहा।

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2010 में भारत का रहा था सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

भारत को एक बार राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करने का मौका मिला था और उस दौरान टीम इंडिया सबसे ज्यादा मेडल अपने नाम करने में सफल रही थी। 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन दिल्ली में हुआ था और भारत ने कुल 101 मेडल जीते थे। इसके अलावा भारत कभी 100 का आंकड़ा छूने में कामयाब नहीं रहा।


 



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