रावलपिंडी छोलों के साथ भठूरे खाने का मन है, तो दिल्ली के ‘ओम दी हट्टी’ पर जरूर जाएं

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(डॉ. रामेश्वर दयाल)

शायद पंजाब में छोले-भठूरे की दुकानें और उसे खाने वाले इतने अधिक नहीं है, जितने देश की राजधानी दिल्ली में हैं. आलम यह है कि दिल्ली की हर सड़क, बाजार, मार्केट और रेस्तरां में छोले-भठूरे की दुकान मिल जाएगी. मिलने वाले इस व्यंजन का दाम कम हो या ज्यादा, खाने वालों की कमी नहीं दिखाई देगी. गर्मी के इस मौसम में छोले-भठूरे खाते हुए लोगों के माथे से पसीने चू रहा हो, गर्मी उन्हें हलकान कर रही हो, लेकिन दिल्ली वालों के मुंह में छोले-भठूरे का स्वाद ऐसा लगा हुआ है कि वे इसे खाए बिना नहीं छोड़ते हैं. दिल्ली की ऐसी ही एक मशहूर दुकान पर आपको लिए चलते हैं. इस दुकान में रावलपिंडी स्टाइल में बने छोलों की खुशबू और गरमा-गरमा भठूरे बता रहे हैं कि कुछ खास बात है इस दुकान में.

हरी चटनी, कटी प्याज, आम का अचार व हरी मिर्च बढ़ाती है स्वाद

सेंट्रल-नॉर्थ दिल्ली के जाने माने कमर्शियल इलाके कमला नगर-शक्ति नगर चौक पर हैं छोले-भठूरे की यह दुकान. नाम है ‘ओम दी हट्टी’. वैसे तो इस नाम से दिल्ली में कई दुकानें हैं लेकिन इनके मालिक का दावा है कि छोले-भठूरे की उनकी यह सबसे पुरानी दुकान है. पहले इस दुकान पर मिलने वाले व्यंजनों की बात कर लें. दुकान के छोले-भठूरे तो सबसे मशहूर है ही, साथ में छोले चावल, छोले कुलचे, समोसे व मीठी लस्सी भी नाम कमा रही है. आपको 80 रुपये में रावलपिंडी छोले की खुशबू के साथ गरमा-गरमा फूले हुए पनीर से भरे भठूरे भी मिलेंगे. साथ में हरी चटनी, कटी प्याज, आम का अचार व मसाले से भरी हरी मिर्च इस स्वाद बढ़ा देगी.

भठूरे का स्वाद दोगुना करने के लिए लस्सी भी है तैयार

इस व्यंजन का स्वाद बढ़ाने के लिए साथ में ठंडी लस्सी भी तैयार है जिसका गिलास 60 रुपये का है. वैसे तो इस दुकान पर 50 रुपये में छोले-कुलचे, 80 रुपये में छोले-चावल, 45 रुपये के छोले-समोसे और इतनी ही कीमत की छोले व खस्ता कचौड़ी की प्लेट हाजिर है, लेकिन डिमांड तो सबसे अधिक छोले-भठूरे की ही है. दुकान सुबह 7:30 बजे खुलती है और शाम 7 बजे तक वहां खाने वालों की आवाजाही लगी रहती है. दुकान में आने वाले लोग भी मानते हैं कि सही मायनों में पंजाबी स्टाइल के छोले-भठूरे इस दुकान पर मिलते हैं. यहां खाने का स्टेंडिंग सिस्टम है और पैकिंग की भी सुविधा है.

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वर्ष 1960 से नाम कमा रही है ‘ओम दी हट्टी’

अब ओम दी हट्टी के बारे में भी जान लें. दुकान की शुरुआत बाल मुकुंद अरोड़ा ने वर्ष 1960 में की. फिर दुकान की कमान उनके बेटे सोमप्रकाश अरोड़ा ने संभाली. आज इस दुकान को उनके दो बेटे इशू व मयंक अरोड़ा संभाल रहे हैं. उनका दावा है कि ओम दी हट्टी दिल्ली की सबसे पुरानी दुकान है. इससे मिलते जुलते नाम से भी दिल्ली में छोले-भठूरे बिक रहे हैं. वे बताते हैं कि भठूरे सेंकने के लिए वनस्पति घी का प्रयोग किया जाता है और दिल्ली की बहुत पुरानी फ्लोर मिल से मैदा-आटा लिया जाता है. इशू बताते हैं कि वह खुद ही मसाले खरीदकर लाते हैं ताकि खाने में स्वाद की क्वॉलिटी कायम रहे.



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