राजपक्षे 14 दिन सिंगापुर में और रह सकेंगे: श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति के पास विजिट परमिशन; पार्टी ने कहा- वो भगोड़े नहीं, जल्द लौटेंगे

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कोलंबो/सिंगापुरएक घंटा पहले

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श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को सिंगापुर सरकार से बहुत बड़ी राहत मिल गई है। अब वो 14 दिन और सिंगापुर में रह सकेंगे। इसके पहले भी उन्हें 14 दिन का प्राईवेट विजिटिंग वीजा दिया गया था। इसकी मियाद 28 जुलाई यानी गुरुवार को खत्म हो रही थी। इसके बाद सवाल उठ रहे थे कि राजपक्षे अब किस देश में शरण लेंगे। दूसरी तरफ, श्रीलंका में मौजूद उनके पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति जल्द देश लौटेंगे। उन्हें भगोड़ा नहीं कहा जा सकता।

कहां जाएंगे गोटबाया
राजपक्षे 13 जुलाई को श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से भाग खड़े हुए थे। कहा जाता है कि वो प्राईवेट जेट से पहले मालदीव और इसके बाद सिंगापुर पहुंचे। सिंगापुर की सरकार ने राजनीतिक शरण देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पूर्व श्रीलंकाई राष्ट्रपति को 14 दिन का प्राईवेट विजिट वीजा परमिशन दी गई। तब से गोटबाया सिंगापुर में हैं। पहली परमिशन की डेडलाइन 28 जुलाई थी। इसके एक दिन पहले उन्हें 14 दिन का विजिट एक्सटेंशन दिया गया है।

अब तक यह साफ नहीं है कि सिंगापुर के बाद राजपक्षे कहां जाएंगे। इसकी वजह यह है कि मालदीव और मॉरिशस ने उन्हें राजनीतिक शरण देने के मामले में अब तक कोई जवाब नहीं दिया है।

सिंगापुर में रहना आसान नहीं
राजपक्षे के साथ दिक्कत यह है कि वो सिंगापुर में ही रहना चाहते हैं, लेकिन श्रीलंका में उनके खिलाफ कई केस दायर हो चुके हैं। वहां के सामाजिक संगठन सिंगापुर सरकार के संपर्क में हैं और राजपक्षे को गिरफ्तार करके श्रीलंका वापस भेजने की मांग कर रहे हैं। यही वजह है कि सिंगापुर सरकार किसी विरोध से बचने के लिए गोटबाया को स्थायी तौर पर पनाह नहीं दे रही।

पिछले दिनों सिंगापुर सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा था- राजपक्षे के पास हमारे देश का विजिटिंग वीजा है। वो 14 दिन के लिए यहां आए हैं। इसे कुछ दिन बढ़ाया जा सकता है, लेकिन पुख्ता तौर पर हम ये नहीं कह सकते कि उन्हें स्थायी शरण मिल जाएगी।

देश छोड़कर भागे थे गोटबाया
राजपक्षे को सत्ता से उखाड़ने इस जन आंदोलन का आखिरी चरण जुलाई के पहले हफ्ते में शुरू हुआ। 9 जुलाई को आम जनता ने राष्ट्रपति आवास और प्रधानमंत्री आवास पर कब्जा जमा लिया। गोटबाया अपना सरकारी घर छोड़कर भाग खड़े हुए। 13 जुलाई को परिवार समेत गोटबाया पहले मालदीव भागे। इसके बाद सिंगापुर पहुंचे। इसी दिन श्रीलंका में फिर से इमरजेंसी लगा दी गई।

श्रीलंका के आर्थिक संकट के लिए जिम्मेदार माने जाने वाले ताकतवर राजपक्षे परिवार को सत्ता से उखाड़ फेंकने का श्रेय आम जनता के आंदोलन को जाता है, जो श्रीलंका के इतिहास में अनूठा है।

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