मुगलों पर बंटा बॉलीवुड: कबीर खान ने कहा था मुगल असली राष्ट्र निर्माता; मनोज मुन्तशिर बोले मुगल डकैत थे, विरोध में बोली ऋचा- अपना नाम भी छोड़ दो

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एक घंटा पहले

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इंडस्ट्री में इन दिनों एक नई बहस शुरू हो गई है। हाल ही में डायरेक्टर कबीर खान ने एक इंटरव्यू में मुग़लों को असली राष्ट्र निर्माता कहा था। उन्होंने यह भी कहा था की वे उन फिल्मों की रिसपेक्ट नहीं कर सकते जिनमें मुग़लों को गलत ढंग से दिखाया जाता है। इस बयान के बाद गीतकार मनोज मुन्तशिर ने एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें उन्होंने मुगलों की तुलना डकैतों से की।

मनोज ने अकबर, जहांगीर और हुमायूं को डाकू कहा। इसके बाद ऋचा चड्ढा, नीरज घेवान ने मनोज की आलोचना की।

ऐसे रहे इंडस्ट्री के लोगों के रिएक्शन
मसान और गीली पुच्ची जैसी फिल्मों के निर्देशक नीरज घेवान ने लिखा, “जातिवाद से लदी कट्टरता!” ऋचा चड्ढा ने नीरज के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा, “चापलूसी। खराब कविता, देखने योग्य नहीं। कलम नाम भी छोड़ देना चाहिए। जिस चीज से आप इतनी नफरत करते हैं उसका लाभ क्यों उठाएं।”

  • पटकथा लेखक मयूर पुरी ने ट्वीट किया, “घृणा बीज क्यों, मनोज भाई? किसी भी देश का पूरी तरह से गुलाबी इतिहास नहीं है। पर लेखकों को आग लगने का नहीं, आग बुझाने का काम करना चाहिए। कृपया बुरा न मानें, लेकिन मैं थोड़ा निराश हूं कि आप इस तरह का काम कर रहे है।”
  • गीतकार और कवि हुसैन हैदरी ने लिखा है कि यह पहली बार नहीं है जब मनोज नफरत या झूठ फैला रहे।

मनोज को मिला विवेक का सपोर्ट
इस बीच मनोज के बचाव में फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री खड़े हो गए। उन्होंने ट्वीट किया, “ओह, लड़के…मनोज मुंतशिर हमेशा अपनी कविता और सार्वजनिक बयानों में निडर होकर अपना दृष्टिकोण व्यक्त करते रहे हैं। अगर आप अज्ञानी हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि वे अचानक बदल गए हैं। मूर्ख लिबरल्स, कृपया बैठ जाएं।”

इसलिए मुगलों की भूमिका पर उठा विवाद
दरअसल फिल्म निर्माता कबीर खान ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि वह उन फिल्मों का सम्मान नहीं कर सकते हैं जो मूल राष्ट्र-निर्माता मुगलों का गलत ढंग से पिक्चराइजेशन करती हैं। उन्होंने कहा, “मुगलों और अन्य मुस्लिम शासकों पर ऊँगली उठाना आज सबसे आसान काम है, जो भारत के इतिहास में कई जगहों पर थे।
उन्हें पूर्वकल्पित रूढ़ियों में फिट करने की कोशिश करना चिंताजनक है। मैं दुर्भाग्य से उन फिल्मों का सम्मान नहीं कर सकता। बेशक यह मेरी निजी राय है। मैं बड़े दर्शकों के लिए नहीं बोल सकता लेकिन मैं निश्चित रूप से इस तरह के चित्रण से परेशान हो जाता हूं।

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