माघी पूर्णिमा: किसी भी नदी में करिए स्नान-दान, लीजिए धर्मलाभ

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<p style=”text-align: justify;”>भारतीय संस्कृति में तीर्थ और पर्व दोनों का महत्व होता है. तीर्थ पवित्र नदियों के किनारे स्थित होते हैं. उन स्थानों पर पर्व मनाने की अपनी महत्ता है लेकिन उन्हीं पर्वों को देश की पवित्र नदियों का आव्हान कर पूरे भारत वर्ष में कहीं भी मनाए जाने



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