बिजली संकट के बीच चीन ने उठाया बड़ा कदम

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Photo:AP

 China says power cuts won’t hit homes in winter, amid crunch

बीजिंग। चीन के योजना आयोग ने बुधवार को कहा कि राष्‍ट्रव्‍यापी ऊर्जा संकट के कारण भले ही कुछ क्षेत्रों में बिजली कटौती की जा रही है, बावजूद इसके देश के उत्‍तरी क्षेत्र में सर्दियों के दौरान घरों को गर्म रखने के लिए बिजली की आपूर्ति पर्याप्‍त रहेगी। नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन के प्रमुख झाओ चेनजिन ने कहा कि चीन बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कोयला उत्‍पादन बढ़ाने के बावजूद अपने कार्बन कटौती लक्ष्‍यों को पूरा करेगा।  

झाओ ने कहा कि कुल मिलाकर हमारे पास सर्दियों के दौरान बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए स्थितियां, संसाधन और क्षमता है। चीन कार्बन उत्‍सर्जन में कटौती के लक्ष्‍य को पूरा करने और बिजली आपूर्ति के तनाव को कम करने के लिए बिजली कटौती कर रहा है, जिसकी वजह से कुछ इलाकों में नागरिकों को जनरेटर का सहारा लेना पड़ रहा है और लोग सेल फोन की लाइट जलाकर रात का खाना खाने पर मजबूर हैं।

झाओ ने कहा कि हीटिंग और बिजली के लिए उपभोक्‍ताओं को एक मानक मूल्‍य का भुगतान करना होगा, वहीं कारखानों को अनुकूलित मूल्‍य निर्धारण प्रणाली के हिस्‍से के रूप में तय निर्धारित मूल्‍य के 20 प्रतिशत अधिक या कम सीमा में भुगतान करना होगा। उन्‍होंने आगे कहा कि इसे मौजूदा 10 प्रतिशत सीमा और 15 प्रतिशत के आधार पर समायोजित किया गया है और इसका उद्देश्‍य अधिक कुशल प्रौद्योगिकयों में निवेश के माध्‍यम से औद्योगिक उन्‍नयन को प्रोत्‍साहित करना है।

झाओ ने कहा कि प्राकृतिक गैस के साथ ही कोयला उत्‍पादन बढ़ाया जा रहा है और मांग को पूरा करने के लिए देश में पर्याप्‍त ऊर्जा भंडार सुनिश्चित किया जाएगा। चीन दुनिया का सबसे बड़ा कार्बन उत्सर्जक है, जो वैश्विक ग्रीनहाउस गैसों का अनुमानित 27 प्रतिशत उत्पादन करता है, इसके बाद संयुक्त राज्य अमेरिका है। चीन अपनी बिजली का लगभग 60 प्रतिशत हिस्‍सा कोयले से प्राप्त करता है और अधिक कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्र खोल रहा है, जबकि जीवाश्म ईंधन के उपयोग को कम करने के लिए भी प्रतिबद्ध है।

देश ने अपनी कुल ऊर्जा जरूरत का 20 प्रतिशत हिस्‍सा 2025 तक नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्‍त करने का लक्ष्‍य रखा है। चीन ने 2030 तक कार्बन उत्‍सर्जन में महत्‍वपूर्ण कमी लाने और 2060 तक कार्बन शून्‍य देश बनने का लक्ष्‍य तय किया है।  

नवीकरणीय ऊर्जा के लिए सोलर पैनल और विंड टर्बाइन बनाने में भी चीन दुनिया में अग्रणी है। बावजूद इसके, अमेरिका और अन्‍य देश चीन पर दबाव डाल रहे हैं कि वह बढ़ते तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस पर बनाए रखने के लिए और अधिक प्रयास करे। झाओ ने कहा कि कोयला उत्‍पादन में वृद्धि और चीन के कार्बन नियंत्रण लक्ष्‍य के बीच कोई विरोधाभास नहीं है। उन्‍होंने कहा कि चीन ने हमेशा अपने द्वारा तय किए गए लक्ष्यों का सम्‍मान किया है और हम उन्‍हें हासिल करने के लिए हर संभव कोशिश करेंगे।

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