पूरे पाकिस्तान में बिजली गुल: इस्लामाबाद, लाहौर और कराची घंटों अंधेरे में डूबे रहे, नेशनल ग्रिड फेल होने से हुआ ब्लैक आउट

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25 मिनट पहले

ब्लैकआउट के बाद पूरे पाकिस्तान में अंधेरा छा गया।

महंगाई और आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के सामने अब बिजली संकट खड़ा हो गया है। पड़ोसी मुल्क में सोमवार को बड़ा पावर कट हो गया है। इस्लामाबाद, लाहौर और कराची जैसे शहर अंधेरे में डूब गए।

ऊर्जा मंत्रालय ने कहा कि नेशनल ग्रिड सुबह 7:34 बजे डाउन हो गई। इसके चलते पावर सिस्टम फेल हो गया। मंत्रालय ने कहा कि सिस्टम को सुधारने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है।

खराब आर्थिक हालातों से जूझ रहे पाकिस्तान में काफी समय से बिजली संकट जारी है।

12 घंटे में ठीक होगा पावर ग्रिड
ऊर्जा मंत्री खुर्रम दस्तगीर ने जिओ न्यूज को बताया कि पाकिस्तान में सर्दियों के दौरान बिजली बचाने के लिए पावर जनरेशन यूनिट्स को बंद रखा जाता है।

सुबह साढ़े सात बजे के करीब जब सिस्टम को ऑन किया गया तो उत्तरी पाकिस्तान के इलाके की वोल्टेज में कई फ्लक्चुएशन यानी बदलाव हुए। फिर एक के बाद एक पूरा सिस्टम ठप पड़ गया। खुर्रम ने कहा है कि पावर ग्रिड को रिस्टोर करने में 12 घंटे लगेंगे।

पाकिस्तान में बिजली कटौती से हुए अंधेरे के बीच एक दुकानदार।

पाकिस्तान में बिजली कटौती से हुए अंधेरे के बीच एक दुकानदार।

कई जगह सिस्टम को रिस्टोर करने का काम शुरू
पाकिस्तान के मीडिया हाउस डॉन के मुताबिक पेशावर और इस्लामाबाद में सिस्टम को रिस्टोर करने का काम शुरू किया जा चुका है। वहीं एक अधिकारी ने बताया कि पूरे पाकिस्तान में 117 पावर ग्रिड बिना बिजली के हैं।​

वहीं​​​​​ जिओ न्यूज के मुताबिक, क्वेटा इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी ने बताया कि बलूचिस्तान के 22 शहरों में सुबह से बिजली नहीं है। यहां गुड्डू से क्वेटा के बीच 2 सप्लाई लाइन में गड़बड़ी आई है।

PMO ने बिजली संकट पर इसी महीने मीटिंग की उसमें लाइट्स नहीं जलाई गईं। सरकार ने बयान जारी कर कहा था कि इसके लिए सूरज की रोशनी का इस्तेमाल किया गया है।

PMO ने बिजली संकट पर इसी महीने मीटिंग की उसमें लाइट्स नहीं जलाई गईं। सरकार ने बयान जारी कर कहा था कि इसके लिए सूरज की रोशनी का इस्तेमाल किया गया है।

पिछले साल 12 घंटे तक गुल रही थी बिजली
पाकिस्तान में पिछले चार महीने में ये दूसरी बार है जब पूरे देश का पावर ग्रिड इस तरह से ठप हो गया हो। पाकिस्तान की सरकार ने इसी साल नया एनर्जी प्लान बनाया था। हालांकि इसे लोगों ने मानने से इंकार कर दिया था।

इस प्लान का विरोधी करने वाले लोगों में ज्यादातर कारोबारी थे।ट्रेड यूनियन के लीडर नोमान अब्बास ने भास्कर से कहा- गरीब और गरीब होता जा रहा है और कारोबार पहले ही खत्म होने की कगार पर है। मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि क्या वो रैलियों में इस्तेमाल होने वाले विमानों और हेलीकॉप्टरों को रोकेंगे?

पिछले साल अक्टूबर में भी पाकिस्तान में बड़ा पावर कट हुआ था। तब कराची, लाहौर जैसे शहरों में करीब 12 घंटे तक बिजली गुल रही थी।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने बैठक के बाद प्रेस कांफ्रेंस में बिजली बचाने के नए प्लान की घोषणा की है।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने बैठक के बाद प्रेस कांफ्रेंस में बिजली बचाने के नए प्लान की घोषणा की है।

पाकिस्तान ने बिजली बचाने के लिए ये प्लान बनााया था

  • अधिक बिजली की खपत करने वाले पंखों का उत्पादन जुलाई से बंद होगा। 2200 करोड़ बचाने में मदद मिलेगी।
  • वेडिंग हॉल्स रात 10 बजे तक बंद कर दिए जाएंगे।
  • एक फरवरी के बाद केवल LED बल्बों का इस्तेमाल किया जाएगा।
  • सरकारी विभागों में 30% बिजली बचाने का ऑर्डर जारी किया है।
  • बाजार रात 8:30 बजे तक ही खोलने की मंजूरी होगी।
  • वर्क फ्रॉम होम लागू किया जाएगा।
कराची में सरकार के बिजली बचाने के प्लान के खिलाफ लोगों ने प्रदर्शन किया है।

कराची में सरकार के बिजली बचाने के प्लान के खिलाफ लोगों ने प्रदर्शन किया है।

बिजली संकट की वजह क्या है
पाकिस्तान में बिजली संकट की मुख्य वजह आर्थिक बदहाली है। दरअसल, यहां के ज्यादातर पॉवर प्लांट में ऑयल से बिजली पैदा की जाती है। यह ऑयल इम्पोर्ट किया जाता है। पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 8 साल में सबसे कम बचा है। तो ऑयल इम्पोर्ट नहीं हो पा रहा। ऑयल इम्पोर्ट न होने से इलेक्ट्रिसिटी प्रोडक्शन नहीं हो पा रहा और इसकी वजह से बिजली की किल्लत हो रही है।

यहां एक चीज और जान लेनी जरूरी है। दरअसल, पाकिस्तान में पानी से बिजली नहीं बनाई जा सकती। इसकी वजह यह है कि यहां वॉटर स्टोरेज के लिए डैम नहीं है। पाकिस्तान ने एटमी ताकत तो हासिल कर ली, लेकिन न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं बना सका, जिनसे बिजली बन सके।

पाकिस्तान को अमेरिका से हमेशा यह शिकायत रही कि वो भारत की तरह उससे सिविल न्यूक्लियर डील क्यों नहीं करता। इसका जवाब अमेरिका यह देता है कि पाकिस्तान एटमी तौर पर जिम्मेदार मुल्क नहीं है और यही वजह है कि भारत की तर्ज पर उससे न्यूक्लियर डील करना मुश्किल है।

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