‘पूछा जो उनसे चांद निकलता है किस तरह’, पेश हैं इश्‍क़ भरे अशआर

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शेरो-सुख़न (Shayari) की दुनिया में हर जज्‍़बात (Emotion) को बेहद ख़ूबसूरती के साथ काग़ज़ पर उकेरा गया है. इसी तरह शायरी में महबूब की ख़ूबसूरती, उसके हुस्‍न (Beauty) और ज़ुल्‍फ़ (Hair) की बात की गई है. शायरों के यहां इस विषय पर गहराई से क़लम चलाई गई है. यही वजह है कि हर शायर के यहां महबूत के हुस्‍न, ज़ुल्‍फ़ का चर्चा मिलता है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए ‘रेख्‍़ता’ के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. शायरों के ऐसे अशआर जिसमें बात ‘ज़ुल्‍फ़ की हो और शायर की कैफियत, उसके दिल की हालत का जिक्र हो. तो आप भी इसका लुत्‍फ़ उठाइए…

पूछा जो उन से चांद निकलता है किस तरह
ज़ुल्फ़ों को रुख़ पे डाल के झटका दिया कि यूं
आरज़ू लखनवीहम हुए तुम हुए कि ‘मीर’ हुए
उस की ज़ुल्फ़ों के सब असीर हुए

मीर तक़ी मीर

अपने सर इक बला तो लेनी थी
मैं ने वो ज़ुल्फ़ अपने सर ली है
जौन एलिया

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नींद उस की है दिमाग़ उसका है रातें उस की हैं
तेरी ज़ुल्फ़ें जिस के बाज़ू पर परेशां हो गईं
मिर्ज़ा ग़ालिब

बहुत मुश्किल है दुनिया का संवरना
तेरी ज़ुल्फ़ों का पेच-ओ-ख़म नहीं है
असरार-उल-हक़ मजाज़

ये उड़ी उड़ी सी रंगत ये खुले खुले से गेसू
तेरी सुब्ह कह रही है तेरी रात का फ़साना
एहसान दानिश

जब यार ने उठा कर ज़ुल्फ़ों के बाल बांधे
तब मैं ने अपने दिल में लाखों ख़याल बांधे
मोहम्मद रफ़ी सौदा

इजाज़त हो तो मैं तस्दीक़ कर लूं तेरी ज़ुल्फ़ों से
सुना है ज़िंदगी इक ख़ूबसूरत दाम है साक़ी
अब्दुल हमीद अदम

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ज़ुल्फ़ें सीना नाफ़ कमर
एक नदी में कितने भंवर
जां निसार अख़्तर

ऐ जुनूं फिर मेरे सर पर वही शामत आई
फिर फंसा ज़ुल्फ़ों में दिल फिर वही आफ़त आई
आसी ग़ाज़ीपुरी





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