नेशनल कोच और टीम डॉक्टर ने लवलीना की निजी कोच के लिए छोड़ दिया अपना खेल गांव का कमरा, जानिए क्या है पूरा मामला

0
0


भारतीय महिला मुक्केबाजी टीम के मुख्य कोच भास्कर भट्ट ने ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन की निजी कोच संध्या गुरूंग को ठहराने के लिये राष्ट्रमंडल खेल गांव में अपना कमरा छोड़ दिया। भट्ट करीब में ही एक होटल में चले गये। संध्या खेल गांव में भट्ट के कमरे में ठहरी हुई हैं। भट्ट ने पीटीआई से कहा, ”मैं यहां खेल गांव से 10 मिनट की दूरी पर स्थित एक होटल में चला गया।”

उन्होंने कहा, ”मैंने स्वेच्छा से अपना कमरा संध्या को दिया क्योंकि यह ‘घर का मामला’ है और अच्छा यही है कि इन चीजों को आपस में ही सुलझा लिया जाये।” भट्ट ने पिछले साल से ही सीनियर महिला टीम के मुख्य कोच पद का भार संभाला था, उन्हें अब भी सभी स्टेडियम और खेल गांव में जाने की अनुमति है। सिर्फ एक बदलाव हुआ है कि वह रात में खेल गांव में नहीं रूक पायेंगे।

उन्होंने कहा, ”मुझे हर जगह जाने की अनुमति है इसलिये मुझे कोई समस्या नहीं है। ”भट्ट के मार्गदर्शन में भारतीय महिला टीम ने मई में हुई विश्व चैम्पियनाशिप में तीन पदक हासिल किये जिसमें से एक स्वर्ण पदक था। सोमवार को टोक्यो ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना ने दावा किया था कि उनकी कोच के ‘लगातार उत्पीड़न’ के कारण उनकी तैयारियां प्रभावित हो रही थीं।

खेलों के शुरू होने से कुछ दिन पहले ही संध्या को भारतीय दल में शामिल किया गया जिसके कारण ही उन्हें ‘एक्रिडिटेशन’ मिलने में देरी हुई। फिर रविवार को तब वह यहां पहुंची तो उन्हें खेल गांव में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गयी क्योंकि उनके पास ‘एक्रिडिटेशन’ नहीं था, इससे विवाद खड़ा हो गया। उन्हें एक होटल में ठहराया गया जहां अतिरिक्त अधिकारी रूके थे।

संध्या को मंगलवार को अपना ‘एक्रिडिटेशन’ मिला लेकिन ऐसा टीम डॉक्टर करणजीत छिब की कीमत पर करना पड़ा जिन्हें खेलों के दौरान अब प्रत्येक दिन दल प्रमुख से अनुमति पत्र की जरूरत होगी। छिब भारतीय दल के आठ मुक्केबाजी अधिकारियों में शामिल थे लेकिन संध्या को शामिल करने के लिये उनका ‘एक्रिडिटेशन’ पी-कोच का करना पड़ा।

भारतीय मुक्केबाजी महासंघ के कार्यकारी निदेशक कर्नल अरूण मलिक ने कहा, ”टीम डॉक्टर का एक्रिडिटेशन पी-कोच का कर दिया गया। इसका मतलब है कि उन्हें खेल गांव जाने के लिये हर रोज सुबह को दल प्रमुख से अनुमति पत्र/पास की जरूरत होगी।”

उन्होंने कहा, ”एक्रिडिटेशन को बदलकर हमने दल के अंदर अधिकारियों की संख्या वही बनाये रखी है और ऐसी व्यवस्था की ताकि हर किसी को फायदा हो।” उन्होंने कहा, ”डॉक्टर अब होटल में रहेंगे और ट्रेनिंग के दौरान पूरे दिन उपलब्ध रहेंगे।”

राष्ट्रमंडल खेलों में कुछ ऐसा रहा है भारत का सफर, जानिए CWG 2022 में किन गेम्स में भारत जीत सकता है मेडल

टीम डॉक्टर वैसे रिंग के बाहर मौजूद नहीं होते क्योंकि आयोजकों के डॉक्टर मुकाबलों के दौरान मुक्केबाजों की मेडिकल जरूरतों का ध्यान रखने के लिये उपस्थित होते हैं। भारतीय मुक्केबाजी दल में 12 मुक्केबाज (आठ पुरूष और चार महिलायें) हैं और खेलों के नियमों के अनुसार केवल 33 प्रतिशत सहयोगी स्टाफ को ही अनुमति दी जाती है। भारतीय टीम के साथ चार सहयोगी स्टाफ होने चाहिए थे लेकिन आईओए की मदद से इन्हें बढ़ाकर आठ कर दिया गया है। 



Source link

पिछला लेखकृष्ण जन्माष्टमी के लिए घर में बनाएं पेड़े, जानिए रेसिपी
अगला लेखGlowing Skin Foods: त्वचा को चमकाने के लिए 1 हफ्ते लें ये आहार, बदल जाएगी चेहरे की रंगत
लेटेस्त भारतीय ब्रेकिंग न्यूज़, अंतर्राष्ट्रीय न्यूज़, भारत से नवीनतम हिंदी समाचार और विदेश से ट्रेंडिंग न्यूज़ केवल और केवल सतर्क न्यूज़ पर पढ़ें। धर्म, क्रिकेट, व्यवसाय, तकनीक, शीर्ष कहानियों, मौसम, मनोरंजन, राजनीति और अधिक तर जानकारी प्राप्त करें।