जूते का सोल रत्तीभर मोटा था-मुकाबले से बाहर हुई एथलीट: 7 महीने पहले बदला था नियम, 1948 ओलिंपिक में नंगे पांव खेली थी इंडियन टीम

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काराकास22 मिनट पहले

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वेनेजुएला की ट्रिपल जंप एथलीट को वर्ल्ड चैम्पियन मुकाबले में भाग लेने से रोक दिया गया। इसके पीछे कारण उनके जूते के सोल की मोटाई थी। वर्ल्ड चैम्पियन मुकाबले के लिए वेनेजुएला की युलिमार रोजासो ने जो जूता पहना था, उसकी मोटाई निर्धारित मानक से ज्यादा थी। जिसके बाद उनको आगे के मुकाबले में भाग लेने से रोक दिया गया है।

स्पोर्ट्स में जूतों के इस्तेमाल को लेकर नियम लगातार बदलते रहे हैं। 1948 के ओलिंपिक में इंडियन फुटबॉल टीम बिना जूतों के खेली थी। इसके अलावा कई ऐसी कहानियों सुनने को मिलती हैं; जब एथलीट जूते न होने पर नंगे पांव मैदान में उतरे।

रोजासो ओलिंपिक में पदक जीत चुकी हैं। साथ ही उनके नाम कई वर्ल्ड रिकार्ड भी हैं।

रोजासो ओलिंपिक में पदक जीत चुकी हैं। साथ ही उनके नाम कई वर्ल्ड रिकार्ड भी हैं।

5 मिलीमीटर से टूट गया वर्ल्ड चैम्पियन बनने का सपना

रोजासो के जूते के सोल की मोटाई निर्धारित 25 मिलीमीटर से मात्र 5 मिलीमीटर ज्यादा थी। जिसके चलते उनका वर्ल्ड चैम्पियन बनने का सपना टूट गया है। 26 साल की वेनेजुएलन एथलीट युलिमार रोजासो इस मुकाबले की प्रबल दावेदार थीं। ट्रिपल जंप में उन्होंने पिछले साल ही दो वर्ल्ड रिकार्ड बनाए हैं।

इसी साल बदला गया था जूतों का नियम

इसी साल की शुरुआत में वर्ल्ड एथलीटिक्स ने जूतों और स्पाइक्स की मोटाई को लेकर नया नियम बनया था। इसके अनुसार फिल्ड गेम्स में जूते की ऊंचाई 20 मिलीमीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। वहीं ट्रिपल जंप के लिए अधिकतम ऊंचाई 25 मिलीमीटर तय की गई थी। लेकिन रोजासो ने क्लाफाइंग मैच के दौरान जो जूता पहना था, उसकी ऊंचाई 30 मिलीमीटर थी। जिसके बाद उन पर कार्रवाई की गई है।

1948 के लंदन ओलिंपिक में इंडियन टीम मजबूत मानी जाने वाली फ्रांस टीम के खिलाफ बिना जूतों के मैदान में उतरी। बावजूद इसके यह मैच 1-1 की बराबरी पर छूटा।

1948 के लंदन ओलिंपिक में इंडियन टीम मजबूत मानी जाने वाली फ्रांस टीम के खिलाफ बिना जूतों के मैदान में उतरी। बावजूद इसके यह मैच 1-1 की बराबरी पर छूटा।

1948 ओलिंपिक में मोजे पहन कर खेली थी इंडियन टीम

1948 के लंदन ओलिंपिक में भारतीय फुटबॉल टीम बिना जूतों के खेली थी। खिलाड़ियों ने केवल मोजे पहन कर मैच खेला था। गांव से आने वाले खिलाड़ी जूते में खेलने में कंफर्टेबल नहीं हो पा रहे थे। यही कारण है कि पुराने समय में कई खिलाड़ी नंगे पांव खेलना ही पसंद करते थे। हालांकि आज नियम काफी बदल चुका है। अब ऐसे मुकाबलों में खिलाड़ियों को बिना जूता खेलने की इजाजत नहीं है। साथ ही समय-समय पर जूते के सोल की ऊंचाई को लेकर भी नियम बनाए जाते रहे हैं।

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