जब दो भारतीय क्रिकेटर्स ने तिरंगे का किया था अपमान, भागना पड़ा था पाकिस्तान

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नई दिल्ली: भारत को आजाद हुए 75 साल हो चुके हैं। आजादी का अमृत महोत्सव (Azadi ka amrit mahotsav) मनाया जा रहा है। हर घर में तिरंगा फहराया जा रहा है। आजादी के बाद देश ने हर क्षेत्र में सफलता के झंडे गाड़े और क्रिकेट भी उससे अछूता नहीं है। 1983, 2007 और 2011 जैसे कई ऐतिहासिक लम्हों से हिंदुस्तानियों को सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। भारतीय क्रिकेटर्स तिरंगे को अपने सीने में लगाकर खेलना अपने लिए सम्मान की बात समझते हैं। मगर एक दौर ऐसा भी था, जब दो भारतीय खिलाड़ियों ने सीरीज के दौरान हमारे राष्ट्रीय ध्वज को सलाम करने से साफ इनकार कर दिया था।

बात 1947-48 की है। आजादी के बाद भारत को अपना पहला विदेशी दौरा करना था। वैसे तो भारतीय टीम 1932 से क्रिकेट खेल रही थी, लेकिन इसबार गुलाम नहीं बल्कि आजाद भारतीय क्रिकेट टीम बनी। लाला अमरनाथ को इस ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए कप्तान बनाया गया। तीन टेस्ट मैच की सीरीज भारतीय खिलाड़ियों की असल परीक्षा थी, यह पहला मौका था जब भारतीय टीम ऑस्ट्रेलियन विकेटों पर खेलती। महान बल्लेबाज डॉन ब्रैडमैन की कप्तानी वाली टीम से लड़ना कतई आसान नहीं था। भारत एक मैच ड्रॉ करारे में कामयाब रहा। ऑस्ट्रेलिया ने श्रृंखला 2-0 से जीत ली।

यह दौरा डॉन ब्रैडमैन की बल्लेबाजी और भारत की हार-जीत से ज्यादा दो खिलाड़ियों की बदतमीजी के लिए कुख्यात हुआ। दरअसल, मेलबर्न में दौरा का तीसरा और आखिरी टेस्ट मैच होना था, लेकिन इससे दो रोज पहले भारत में महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई। भारतीय खिलाड़ियों में खलबली मच गई, क्योंकि देश का माहौल तो वैसे ही खराब था। हिंदू-मुस्लिम दंगे से देश जूझ रहा था। ऊपर से बापू की हत्या से माहौल और गरमा चुका था। दौरा रद्द करने की बात भी चली, लेकिन अंत में यह फैसला लिया गया कि भारतीय प्लेयर्स बांह पर काली पट्टी बांधकर मैच खेलेंगे और तिरंगे को सैल्यूट कर गांधी जी को श्रद्धांजलि देंगे।

Amir Elahi

अबतक तो सबकुछ ठीक था, लेकिन भारतीय टीम के दो खिलाड़ियों ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया। ये थे बड़ौदा से आने वाले अमीर इलाही और हैदराबाद के गुल मोहम्मद। लाहौर में पैदा हुए दोनों ही खिलाड़ी जिन्ना से प्रभावित थे और भारत लौटकर पाकिस्तान की नागरिकता लेना चाहते थे और वही बसना चाहते थे। मगर तब कप्तान रहे लाला अमरनाथ ने दोनों के खूब खरी-खोटी सुनाई थी, उनसे अपने तिरंगे की तौहीन बर्दाश्त नहीं हुई। उनका कहना था कि स्वदेश लौटकर गुल और इलाही चाहे जो देश से खेले, लेकिन फिलहाल तो दोनों भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।



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