चुनावी नतीजों के पहले BJP-कांग्रेस आमने सामने, डोटासरा बोले-‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचें’

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Jaipur: गांवों की सरकार के चुनाव हो चुके हैं और शनिवार को नतीजे भी आ जाएंगे अब से कुछ घंटे बाद ईवीएम (EVM) खुलना शुरू हो जाएंगी. लेकिन नतीजों से ठीक पहले बीजेपी ने अपने शब्दबाणों का मुंह सरकार और सत्ताधारी पार्टी की तरफ़ कर दिया है. इस हमले के बीच कुछ जगह बीजेपी (BJP) के सुर बदले हुए भी दिख रहे हैं. 
अब तक बड़ी जीत और सभी छह ज़िला परिषदों में अपना प्रमुख बनाने के दावे करने वाली बीजेपी मतगणना से ठीक पहले सरकार पर मशीनरी के दुरूपयोग के आरोप लगा रही है. आरोप-प्रत्यारोप के इस सिलसिले में पलटवार करते हुए पीसीसी चीफ ने तो राज्यपाल पर ही सवाल उठा दिए है. गोविन्द डोटासरा (Govind Dotasara) ने कहा है कि सत्ता का दुरूपयोग तो केन्द्र सरकार (Central Government) से लेकर दूसरे राज्यों में बीजेपी की सरकारों और राजस्थान के राजभवन तक में हो रहा है. 

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प्रदेश में गांवों की सरकार के चुनाव सम्पन्न होने के बाद शनिवार को वोटों की गिनती होगी. सुबह 9 बजे से ईवीएम खुलना शुरू हो जाएंगी. काउन्टिंग शुरू होने से ठीक पहले बीजेपी ने सरकार और उसकी मशीनरी पर सवाल उठाए हैं. बीजेपी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री रहे अरुण चतुर्वेदी (Arun Chaturvedi) ने कहा है कि पंचायतीराज चुनाव (Panchayati Raj Elections) में कांग्रेस की तरफ़ से सत्ता का भरपूर दुरूपयोग करने की कोशिश हुई है. चतुर्वेदी ने इसके कुछ उदाहरण गिनाते हुए कहा कि कांग्रेस (Congress) के किसी राजनीतिक रसूख वाले प्रत्याशी के सामने बीजेपी का कोई मजबूत उम्मीदवार (Candidate) उतरा तो पुलिस या प्रशासन के जरिए दबाव डलवाकर नामांकन वापस कराया गया.

बीजेपी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष ने लगाए आरोप
चतुर्वेदी ने आगे कहा कि अगर नाम वापस नहीं लिया गया तो कई जगह स्क्रूटनी के दौरान नामांकन ही निरस्त करा दिए गए है. उन्होने कहा कि कामा विधायक जाहिदा की पुत्री के सामने फॉर्म भरने वाले प्रत्याशी का नामांकन वापस कराया तो इसी तरह उच्चैन में विधायक जोगिन्दर अवाना (Joginder Awana) के प्रभाव के आगे नतमस्तक दिखा. चतुर्वेदी ने चिकित्सा राज्य मंत्री के रिश्तेदार और वैर में भजनलाल जाटव (Bhajanlal Jatav) के रिश्तेदारों को फ़ायदा पहुंचाने के प्रशासनिक प्रयासों का खुलासा किया. इसके साथ ही चतुर्वेदी ने विधायक दिव्या मदेरणा (Divya Maderna) पर एक घंटे तक फर्जी मतदान कराने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के वीडियो सामने आने के बाद भी राज्य निर्वाचन आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की है. 

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उधर वोटों की गिनती से ठीक पहले बीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस और उसमें सरकार पर लगाए आरोपों को कांग्रेस ने सिरे से खारिज किया है. कांग्रेस इसे बीजेपी की बैखलाहट बता रही है. पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि ‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचें’. 

डोटासरा ने किया पलटवार
डोटासरा ने आगे कहा कि बीजेपी को अपनी हार सामने दिख रही है तो पार्टी बौखला रही है. उन्होंने कहा कि अगर सत्ता का दुरूपयोग कहीं देखना है तो एनडीए (NDA) की केन्द्र सरकार के काम को देखा जाए. उन्होंने कहा कि बीजेपी राज में धौलपुर उप चुनाव में सत्ता का दुरूपयोग सभी ने देखा है. सत्ता का दुरूपयोग देखना है तो मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में देखना चाहिए कि किस तरह चुनाव में फॉर्म भरने से रोका जाता है और फॉर्म रिजेक्ट किए जाते हैं. डोटासरा ने कहा कि सत्ता का दुरूपयोग देखना है तो शाहजहांपुर में किसान आंदोलन को देखिए जो केन्द्र सरकार के कृषि कानूनों (Agricultural laws) के खिलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं. 
डोटासरा यहीं नहीं रुके, उन्होंने राज्यपाल पर सत्ता के दुरूपयोग के आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता का दुरूपयोग देखना हो तो राजस्थान में देखिए, जहां सरकार की तरफ़ से पारित तीन कृषि कानूनों को ऊपर नहीं भेजकर राजभवन में लटकाकर रखा गया है.

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अरुण चतुर्वेदी ने क्या कहा 
सरकार और सत्ताधारी पार्टी पर निशाना साधते हुए अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि काउन्टिंग से ठीक पहले भरतपुर (Bharatpur) में एक उपखण्ड अधिकारी ने फरमान जारी करते हुए यह कह दिया कि प्रत्याशी को काउन्टिंग ऐजेन्ट के फॉर्म पर निर्वाचन अधिकारी के सामने ही दस्तखत करने होंगे. चतुर्वेदी ने कहा कि बीजेपी के दबाव में ज़िला प्रशासन को यह आदेश निरस्त करना पड़ा, लेकिन इसमें प्रशासन की नीयत की खोट उजागर हो गई है. चतुर्वेदी ने आगे कहा कि शायद मंशा यह रही होगी कि बीजेपी का प्रत्याशी आए और उसे उठाकर या दबाव डालकर अपने पक्ष में कर लिया जाए.

चुनाव के दौर में बीजेपी ने सभी ज़िला परिषद में अपनी बम्पर जीत का दावा किया, लेकिन अब मतगणना से ठीक पहले प्रशासनिक मशीनरी पार्टी के निशाने पर आ गई है. इसे लेकर कांग्रेस भी सवाल उठा रही है. पूछा यह जा रहा है कि अगर बीजेपी अपनी जीत के प्रति आश्वश्त है तो नतीजों से ठीक पहले इस तरह के आरोप क्यों? कांग्रेस इसे बीजेपी की बौखलाहट बता रही है और कह रही है कि क्या बीजेपी अपनी हार का ठीकरा बीच में चुनावी मैदान छोड़ने वाले खुद के ही प्रत्याशियों पर फोड़ना चाहती है.





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