गुजराती खाने का है अगर शौक, ईस्ट पेटल नगर में ‘न्यू रचना’ पर मिलेंगी ढ़ेर सारी वैराइटीज

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(डॉ.रामेश्वर दयाल)  देश और दिल्ली में आजकल गुजराती खान-पान (Gujarati Food) का चलन बढ़ चला है. अब तो यह घरों के किचन तक पहुंच चुका है. ऐसा भी हो रहा है कि लोग अब अपने भोजन या नाश्ते में गुजराती व्यंजन (Gujarati Dishes) भी शामिल करने लगे हैं. हम इसका कारण तलाशें तो पाएंगे कि गुजराती खानपान इसलिए मशहूर हो चुका है, क्योंकि यह तीखा बहुत कम होता है और इसके व्यजंन इस प्रकार के हैं जो आसानी से हजम हो जाते हैं. लगे हाथों आपको यह भी बताते चलें कि हिंदी फिल्मों ने भी गुजराती व्यंजनों को मशहूर करने में अपना बड़ा योगदान दिया है. अब तो हालात यह हो गए हैं कि हर व्यक्ति किसी न किसी गुजराती व्यंजन का नाम और उसके स्वाद की जानकारी दे देगा. इनमें ढोकला, खांडवी तो मशहूर है ही, अब तो फाफड़ा तक को लोग पसंद करने लगे हैं.

गुजराती व्यंजनों के मशहूर होने का पता इस बात से भी चलता है कि राजधानी के अनेक इलाकों में ऐसी दुकानें भी खुल गई हैं जो गुजराती व्यजंन और नमकीन को बेचने में प्रमुख हैं. ऐसी ही एक दुकान से हम आपका परिचय कराने जा रहे हैं.

गुजराती व्यजंनों की हैं ढ़ेर सारी वैराइटीज

दुकान पर पहुंचने से पहले एक बात और भी जान लें कि आप सुबह दूध-दही लेने किसी डेरी वाले के पास जाएंगे तो उसकी दुकान पर आपको ढोकला आदि डिश रखे दिखाई देंगे. अलग स्वाद लिए हुए हरी मिर्च भी साथ में मिलेगी तो हरी मिर्च का पैकेट भी आप अलग से खरीद सकते हैं. गुजराती व्यंजनों और नमकीन की ऐसी ही दुकान ईस्ट पटेल नगर में मौजूद है. इस दुकान को ‘न्यू रचना’ के नाम से जाना जाता है.

यहां बेसन ढोकला के अलावा चावल, चना दाल, मसाला खासा मशहूर है.

इस दुकान पर गुजराती व्यजंनों से लेकर नमकीन की भरमार है. चूंकि यह दुकान बहुत पुरानी है, इसलिए आप विश्वास कर सकते हैं कि वहां पर गुजरात का असली टेस्ट आपको मिलेगा ही. गुजराती व्यंजनों में
ढोकला सबसे अधिक नाम कमा रहा है, तो इसकी बात करें तो दुकान में चार किस्म के ढोकला आपको मिलेंगे. इनमें बेसन ढोकला के अलावा चावल, चना दाल, मसाला खासा मशहूर है.

पीले ढोकले पर हरा धनिया अलग ही शोभा देता है. ये ढोकला 50 रुपये प्लेट में आपको मिल जाएगा, जिसका वजन 200 ग्राम होगा. खाते वक्त आपको आनंद आए, इसके लिए साथ में हरी मिर्च और खजूर की मीठी चटनी , नारियल-पुदीना की खट्टी चटनी और ऊपर से कुछ मूंगफली के दाने के साथ इसे सर्व किया जाता है. इस दुकान का गुजराती व्यजंन खांडवी, थेपला, फाफड़ा, गुजराती आलू चिप्स भी खासा नाम कमा रही है.

यहां ढोकला 50 रुपये प्लेट में मिल जाएगा, जिसका वजन 200 ग्राम होगा.

1965 से बिक रहे हैं व्यजंन

इस दुकान पर गुजराती नमकीन की भी कई वैराइटीज है. गुजरात के अधिकतर नमकीन कम मसालेदार होते हैं, लेकिन दुकानदार स्पेशल मसालेदार-तीखे और खट्टे-मीठे नमकीन भी मंगवाते हैं. आप इस दुकान का कोई भी नमकीन खाइए, आपको अलग ही स्वाद मिलेगा. इस नमकीन का स्वाद तो पंजाबी नमकीन जैसा बिल्कुल भी नहीं होगा. लोग आते हैं, गुजरात का भोजन खाते हैं अरे पैक करके घरों के लिए भी ले जाते हैं.

यह दुकान इस इलाके में साल 1965 में खुली थी. इसे कृष्ण गोपाल सूद ने शुरू किया था. उनकी रिश्तेदारी गुजरात में खूब थी, इसलिए उन्होंने यह कारोबार शुरू किया जो चल निकला. आज उनके दो भाई विनोद और अशोक सूद और बड़े भाई साहब के बेटे अंकित और राकेश इस दुकान में मिलकर काम करते हैं. दुकान सुबह 10 बजे खुल जाती है और रात 9 बजे तक कामकाज चलता है. दोपहर को रोजाना 2 से 4 बजे तक ब्रेक रहता है. सोमवार को दुकान बंद रहती है.

नजदीकी मेट्रो स्टेशन: पटेल नगर

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