क्या Rishabh Pant को पूरी तरह जल चुकी कार का मिलेगा बीमा? ये होंगे न मिलने के कारण

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हाइलाइट्स

पंत की मर्सिडीज कार दिल्ली-देहरादून हाइवे पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी.
दुर्घटना में पंत को काफी चोटें आई हैं और उनकी कार पूरी तरह जल गई है.
कार इंश्‍योरेंस पॉलिसी आग से हुए नुकसान को भी कवर करती है.

नई दिल्‍ली. टीम इंडिया के विकेटकीपर ऋषभ पंत (Rishabh Pant Accident) शुक्रवार तड़के एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से चोटिल हो गए. दिल्ली से अपने घर रुड़की जा रहे पंत की मर्सिडीज कार दिल्ली-देहरादून हाइवे पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई. हादसे से कार में आग लग गई और यह जलकर खाक हो गई. क्या पंत को जली कार बीमा मिलेगा? इस सवाल के 2 जवाब हो सकते हैं- पहला जवाब है मिलेगा, दूसरा नहीं मिलेगा. आज हम आपको बता रहे हैं कि इस तरह के मामलों में बीमा को लेकर क्या होता है.

बीमा जानकारों का कहना है कार मालिक को आग से हुए नुकसान का क्‍लेम मिलेगा या नहीं, यह बीमा पॉलिसी के नेचर पर निर्भर करता है. अगर कार का केवल थर्ड पार्टी बीमा (Third Party Insurance) कराया गया है, तो कंपनी किसी प्रकार का क्‍लेम नहीं देगी. वहीं, अगर कार का कांप्रेहेंन्सिव इंश्‍योरेंस प्‍लान (Comprehensive Insurance Plan) है, तो कार मालिक के नुकसान की भरपाई करने को कंपनी बाध्‍य है. लेकिन, इसमें भी शर्तें लागू होती हैं.

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यहां यह जान लेना जरूरी है कि इंश्‍योर्ड गाड़ी दुर्घटना या आग कि वजह से पूरी तरह डैमेज हो जाए, तो भी इंश्‍योरेंस कंपनी कार मालिक को नई गाड़ी नहीं देती है. अगर कार ठीक होने लायक है, तो बीमा कंपनी गाड़ी को ठीक कराने में लगे पैसे का भुगतान करती है. वहीं, अगर गाड़ी आग से इतनी जल चुकी है कि वो ठीक नहीं हो सकती, तो कंपनी गाड़ी कि इंश्‍योर्ड डिक्‍लेयर्ड वैल्‍यू (IDV) देने के लिए ही बाध्‍य है.

क्‍या है IDV
मारूति सुजुकी इंश्‍योरेंस के इंश्‍योरेंस एडवाइजर पवन कुमार बिश्‍नोई का कहना है कि इंश्‍योर्ड डिक्‍लेयर्ड वैल्‍यू बीमा कंपनी द्वारा निर्धारित अधिकतम बीमा राशि है, जो बीमित वाहन के चोरी होने या पूरी तरह दुर्घटना में नष्‍ट होने पर वाहन मालिक को दी जाती है. मूल रूप से, आईडीवी वाहन का वर्तमान बाजार मूल्य है. अगर वाहन को कुल नुकसान होता है, तो आईडीवी वह मुआवजा है जो बीमाकर्ता पॉलिसीधारक को प्रदान करेगा. आईडीवी की गणना वाहन निर्माता के सूचीबद्ध बिक्री मूल्य (listed Selling Price) में से मूल्यह्रास (Depreciation) घटाकर की जाती है.

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पवन का कहना है कि आईडीवी का निर्धारण वाहन का बीमा करते वक्‍त ही हो जाता है. खास बात यह है कि बीमा करते वक्‍त जो आईडीवी निर्धारित किया गया था, वह क्‍लेम लेते वक्‍त मिले यह जरूरी नहीं है. उदाहरण के लिए अगर बीमा पॉलिसी जनवरी में ली गई थी और गाड़ी दुर्घटनाग्रस्‍त जून में होती है तो गाड़ी मालिक को उतने पैसे नहीं मिलेंगे, जितने जनवरी में निर्धारित हुए थे. इसका कारण यह है कि गाड़ी के 6 महीने चलने से उसकी वैल्‍यू भी कम हुई है. इस कारण जून में आईडीवी भी कम होगी.

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इन मामलों में नहीं मिलता बीमा
अगर गाड़ी में आग शॉर्ट सर्किट या ओवरहिटिंग की वजह से लगती है, तो क्‍लेम नहीं मिलता. इसके अलावा अगर गाड़ी में बीमा कंपनी को जानकारी दिए बिना लगाई गई एक्‍ससेसरीज आग लगने की वजह बनती है, तो भी कंपनी क्‍लेम देने के लिए बाध्‍य नहीं है. कार मालिक द्वारा जानबूझकर आग लगाने पर भी इंश्‍योरेंस क्‍लेम नहीं मिलता.

Tags: Auto News, Car accident, Car insurance, Insurance, Rishabh Pant



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