क्या 2030 तक स्मार्टफोन्स का नामो-निशां हो जाएगा खत्म? आपका दिमाग होगा सीधा इंटरनेट से कनेक्ट – will smartphones be extinct by 2030 your brain will be directly connected to the internet

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नई दिल्ली। अगर आपको कहा जाए की अपना स्मार्टफोन छोड़ दीजिये? तो क्या आप ऐसा कर पाएंगे? अधिकतर लोगो अपने स्मार्टफोन को 2 घंटे भी खुद से दूर नहीं रख पाते। काम हो या एंटरटेनमेंट यूजर्स जिंदगी में बहुत सी चीजों के लिए सिर्फ अपने स्मार्टफोन पर निर्भर हैं। सुबह उठकर खबरें पढ़नी हो, ऑफिस जाने के लिए राइड बुक करनी हो, लंच के लिए पेमेंट करनी हो, घर के लिए की समान मंगवाना हो, भूख लगी है कुछ खाना हो या किसी स्पेशल ओकेजन पर किसी को कुछ गिफ्ट भेजना हो, बैंक की ट्रांजैक्शंस देखनी हो, कोई मूवी देखनी हो, दवाई का अलार्म लगाना हो- सुबह से रात तक हर छोटे काम के लिए आप स्मार्टफोन पर निर्भर हैं।

नोकिया के सीईओ कुछ ऐसा दावा करते हैं जो आपको सोचने पर मजबूर कर सकता है। नोकिया के सीईओ Pekka Lundmark, का दावा है की 2030 तक काफी हद्द तक स्मार्टफोन्स नहीं रहेंगे। उनका दावा है की- कई डिवाइसेज को सीधा हमारे शरीर में इम्प्लांट यानी की शरीर के अंदर लगा दिया जाएगा।” Davos में वर्ल्ड इकनोमिक फोरम में पैनल में उन्होंने बोला की आने वाली शताब्दी में स्मार्टफोन का नामो-निशान मिट जाएगा। इसी के साथ 6G का कमर्शियल इस्तेमाल 2030 तक शुरू हो जाएगा।

जब उनसे पूछा गया की कब स्मार्टफोन्स की जगह स्मार्ट ग्लासेज या कोई और डिवाइसेज ले लेंगे? तो Lundmark ने कहा ऐसा 6G के आने से पहले ही हो जाएगा। उनका कहा है की- स्मार्टफोन्स को जैसे हम आज जानते हैं तब यह सबसे कॉमन इंटरफेस नहीं रहेगा। कई चीजें सीधा हमारे शरीर में बनाई जाएंगी।

हालांकि, Pekka Lundmark ने यह नहीं बताया की ये इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स कौन-से होंगे जो लोगों को फ़ोन्स छोड़ने पर मजबूर कर देंगे। 2030 में 6G नेटवर्क की टेक्निकल जरूरतें भी काफी हद तक बदल जाएंगी। इसे बड़े स्तर पर कंप्यूटिंग पावर और फास्टर नेटवर्क स्पीड की जरूरत पड़ेगी। यह अभी मौजूद नेटवर्क से करीब 100 गुना या 1,000 गुना फास्ट होगा।

कैसे होगा टेक्नोलॉजी का भविष्य?
ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है की 2050 तक लोग स्मार्टफोन्स का इस्तेमाल बंद कर देंगे। इसकी जगह उनका दिमाग सीधा इंटरनेट से कनेक्ट किया जाएगा। एडवांस्ड ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेसेज के जरिए इंसानी दिमाग को इंटरनेट से कनेक्ट किया जाएगा। जब किसी को किसी जानकारी की जरूरत होगी, जैसे की- किसी दोस्त को कॉल करो, लाइट ऑन कर दो, खाना आर्डर करो तो बस इस सब के बारे में सोचना होगा और ऐसा हो जाएगा। नार्मल ब्रेन फंक्शन के साथ AI अल्गोरिथ्म्स रन करेंगी। यह लोगों को नए स्किल सीखने में, अपनी लाइफ मैनेज करने में और कठिन टास्क को करने में मदद करेगा। क्लाउड किसी इंसान के भेजे यानि दिमाग का एक्सटेंशन बन जाएगा।



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