क्या आपका बच्चा फोन लेने की करता है जिद? इन 5 संकेतों से समझ लें, अब उसे मोबाइल देने की है जरूरत

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हाइलाइट्स

बच्चे को मोबाइल देने की सही उम्र 12-14 वर्ष हो सकती है.
कुछ संकेतों से आप समझ सकते हैं कि बच्चे को कब देना चाहिए मोबाइल.
यह पूरी तरह से पैरेंट्स पर निर्भर करता है कि वे अपने बच्चे को मोबाइल कब दें.

Signs your kid is ready for mobile: आजकल मोबाइल हर किसी की जरूरत बन चुकी है. यह सिर्फ बात करने तक ही सीमित नहीं है, गाने सुनना हो, फिल्म देखनी हो, मोबाइल एक चलता-फिरता टीवी और म्यूजिक सिस्टम बन चुका है. साथ ही यह एक सेफ्टी डिवाइस भी है, जिससे हम बाहर रहने वाले अपनों का हालचाल या अपनी खैरियत, किसी को अपनी जानकारी दे पाते हैं. ऐसे में सवाल यह उठता है कि बच्चों को मोबाइल देने का सही वक्त क्या है? दरअसल, आजकल छोटी उम्र से ही बच्चे अपने माता-पिता के मोबाइल से खेलना या उसका उपयोग करना शुरू कर देते हैं, लेकिन पैरेंट्स को यह समझना जरूरी है कि बच्चे को मोबाइल देने का एक सही वक्त होता है. यहां हम उसी के बारे में बता रहे हैं.

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इन 5 संकेतों से समझें मोबाइल यूज करने के लिए तैयार हैं बच्चे 

सही उम्र – प्यू रिसर्च ऑर्गनाइजेशन के द्वारा किए गये सर्वे के अनुसार, बच्चे को मोबाइल देने की सही उम्र 12-14 वर्ष हो सकती है. फिर भी, इस उम्र से पहले या बाद में फोन देने का अंतिम निर्णय माता-पिता का होता है और यह बच्चे की जिम्मेदारी, आत्म-नियंत्रण और मैच्युरिटी के स्तर पर निर्भर करता है, इसलिए यह पूरी तरह से पैरेंट्स का निर्णय है कि वे बच्चे को कौन सी उम्र में मोबाइल देना चाहते हैं.

हैंडल करने का तरीका- सिर्फ उम्र ही नहीं, चाइल्ड माइंड इंस्टीट्यूट के क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. जेरी बुब्रिक का सुझाव है कि माता-पिता फोन देने की योजना बनाते समय अपने बच्चे की सोशल अवेयरनेस और टेक्नोलॉजी का उपयोग करने की समझ पर भी विचार करें. बच्चे टेक्नोलॉजी को लेकर कितने जिम्मेदार और जागरूक हैं, वे कितने सही तरीके से इस डिवाइस का उपयोग करते हैं, यह ध्यान देना पैरेंट्स के लिए जरूरी है.

जिम्मेदारी की समझ – चाइल्ड माइंड इंस्टीट्यूट के क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. जेरी बुब्रिक का यह भी कहना है कि पैरेंट्स को यह देखना होगा कि उनके बच्चे कितने जिम्मेदार स्वभाव के हैं. इसका मतलब यह है कि वे अपने चीजों को कैसे संभालते हैं. कहीं वो अपनी चीजों को स्कूल बस या कहीं किसी जगह पर छोड़ तो नहीं आते. कहीं वे अपने कीमती चीजों को खो तो नहीं देते. अगर आप उन्हें कोई महत्वपूर्ण बात बताते हैं तो क्या वे उस पर ध्यान देते हैं और आपके बताए गए बात का ध्यान रखते हैं. बच्चे के इन सभी संकेतों से आपको उनके जिम्मेदार होने का पता चल पाएगा. फिर इसी आधार पर आप निर्णय लें कि वे मोबाइल के लिए तैयार हैं या नहीं.

स्क्रीन टाइम- डॉ. जेरी बुब्रिक, ने बच्चे के स्क्रीन टाइम को लेकर भी कंसर्न जताया है. उनका कहना है कि पैरेंट्स को बच्चे को मोबाइल देने से पहले उनके स्क्रीन टाइम पर भी ध्यान देना आवश्यक है. बच्चे टीवी या कंप्यूटर पर कितना समय बिताते हैं, इस बात का ध्यान रखना जरूरी है. बच्चे के अंदर अपना स्क्रीन टाइम कंट्रोल करने की समझ है या नहीं. अगर वे टीवी या कंप्यूटर से खुद को अलग नहीं रख पाते हैं तो हो सकता है वे मोबाइल के उपयोग को लेकर भी अपने आपको कंट्रोल न कर सके. इसलिए पैरेंट्स को उनके स्क्रीन टाइम को ध्यान में रखते हुए ही उन्हें मोबाइल देने का निर्णय करना चाहिए.

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पैसे की अहमियत – एक्सपर्ट का यह भी मानना है कि पैरेंट्स को समझना चाहिए कि उनके बच्चे पैसे को कितनी अहमियत देते हैं. कहीं ऐसा तो नहीं है कि वे एक गेम खेल रहे हैं, जिसे पूरा करने से पहले वे दूसरे गेम की डिमांड कर रहे हों. इसलिए यह जरूरी है कि मोबाइल देने से पहले उन्हें पैसे की अहमियत समझाई जाए ताकि वे दूसरे बच्चों को देखकर नए मोबाइल के लिए डिमांड न करें, बल्कि यह समझें कि मोबाइल एक जरूरत की चीज है ना कि दिखावा करने की.

Tags: Kids, Lifestyle, Parenting, Parenting tips



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