कृषि कानून: SC के आर्डर पर बोले संबित पात्रा, ‘BJP फैसले को स्‍वीकार करती है, आशा है दूसरा पक्ष भी…’

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संबित पात्रा ने कहा, दोनों पक्षों को फैसले को स्‍वीकार करना चाहिए (फाइल फोटो)

खास बातें

  • कहा, कोर्ट की गरिमा में राष्ट्र की गरिमा है
  • आशा है कोर्ट का फैसला दूसरा पक्ष भी स्‍वीकार करेगा
  • मोदी सरकार का लक्ष्‍य किसान और गरीब का उत्‍थान

नई दिल्‍ली:

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा तीनों कृषि कानूनों (Farm Laws) के अमल पर रोक लगाने के मंगलवार के आदेश पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्‍ता संबित पात्रा (Sambit Patra) ने प्रतिक्रिया दी है. संबित ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन को लेकर फ़ैसला सुनाया, भाजपा इस फ़ैसले को स्वीकार करती है. कोर्ट की गरिमा में राष्ट्र की गरिमा है. आशा रखते हैं कि कोर्ट के फ़ैसले को दूसरे पक्ष भी स्वीकार करेगा और बताए गए रास्ते पर सभी आगे बढ़ेंगे.’ बीजेपी प्रवक्‍ता नेकहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का लक्ष्य किसान और गरीब का उत्थान है. हर खेत तक पानी और किसान की आमदनी दोगुनी कैसे हो, इसके लिए दिन-रात काम किया है. इस पर और काम होगा. हिंदुस्तान आत्मनिर्भर बनेगा, इसके लिए हमें सभी संस्थाओ पर भरोसा रखना होगा.

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गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के आंदोलन से उत्पन्न स्थिति का समाधान खोजने के प्रयास में तीनों विवादास्पद कानूनों के अमल पर रोक लगाने के साथ ही किसानों की शंकाओं और शिकायतों पर विचार के लिये एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है.कोर्ट ने हरसिमरत मान, कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी, डॉ प्रमोद कुमार जोशी (पूर्व निदेशक राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन), अनिल धनवत के नाम कमेटी के सदस्य के तौर पर सुझाए हैं. बहरहाल, किसान नेताओं ने कहा है कि SC की तरफ से नियुक्त किसी भी समिति के समक्ष वे किसी भी कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेना चाहते.

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किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने मंगलवार को कहा था, ‘हमें लगता है कि ये सरकार की शरारत है कि ये सुप्रीम कोर्ट के ज़रिए कमेटी ले आए. कमेटी के सारे सदस्य सरकार को सही ठहराते रहे हैं. ये लोग प्रेस में आर्टिकल लिखकर क़ानूनों को सही ठहराते रहे हैं. तो ऐसी कमेटी के सामने क्या बोलें. हमारा ये आंदोलन चलता रहेगा. कल को ये कमेटी के लोग बदल भी दें तो भी हम कमेटी के सामने नहीं जाएंगे. हमारा ये संघर्ष अनिश्चितकालीन है. हम शांतिपूर्ण तरीक़े से आंदोलन चलाते रहेंगे.’

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