ओएनजीसी परियोजनाओं के लिए 30,000 करोड़ रुपए की खरीद करेगी, घरेलू कंपनियों को मिलेगा फायदा

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Photo:PTI

ओएनजीसी करेगी 30,000 करोड़ रुपए की खरीद 

नई दिल्ली। सरकारी कंपनी ओएनजीसी ने रविवार को कहा कि वह अपने तेल एवं गैस उत्खनन और उत्पादन परिचालन के काम के लिए 30,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के उपकरण और सेवाओं की खरीद करेगी। कंपनी का कहना है कि इससे स्थानीय इकाइयों के कारोबार एवं आत्मनिर्भर भारत अभियान में मदद मिलेगी। कंपनी ने एक बयान में कहा, “तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड (ओएनजीसी) आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है। ये मुख्य रूप से पारदर्शिता बढ़ाने और अनुबंध कार्यों को सुव्यवस्थित करने पर केंद्रित हैं। इनसे ओएनजीसी के व्यापारिक भागीदारों के लिए एक व्यापार अनुकूल वातावण सुधरेगा।” 

ओएनजीसी ने अपने यहां अनुबंध पर कारोबार करने वाली इकायों की सुगमता बढ़ाने उद्देश्य से एक विशेष ऑनलाइन व्यापार भागीदार सम्मेलन ‘बिल्डिंग ब्रिजेज इन ओएनजीसीज सप्लाई चेन: आत्मनिर्भर भारत: प्रॉस्पेरस इंडिया ‘का आयोजन किया। कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक सुभाष कुमार ने कंपनी के निदेशकों के साथ मिलकर उपकरण एवं सेवा प्रदाताओं के साथ बातचीत की तथा प्रक्रियाओं को और बेहतर करने एवं आसान बनाने के लिए उनसे सुझाव लिए। बयान के अनुसार, “ओएनजीसी को वित्तीय वर्ष 2021-22 में अपने यहां बड़ी एलएसटीके (पूरी तरह बाहरी कंपनी से पूर्ण करायी जाने वाली ) परियोजनाओं पर 15,500 करोड़ रुपए, प्रमुख सेवाओं पर 13,600 करोड़ रुपए और प्रमुख सामग्री की खरीद पर 2,250 करोड़ रुपए का खर्च करने का अनुमान है।” उन्होंने कहा कि वस्तुओं और सेवाओं की खरीद के लिए प्रौद्योगिकी आधारित प्रकिया अपनायी जा रही है ताकि इसमें परदर्शिता बढ़े। कंपनी के निदेशक (प्रौद्योगिकी एवं परियोजना-स्थल सेवाएं) ओपी सिंह ने कहा कि ओएनजीसी आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुसार स्थानीयकरण को प्रोत्साहन दे रही है। 

बीते महीने आए नतीजों के मुताबिक ओएनजीसी ने बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में 6,734 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है। ओएनजीसी द्वारा जारी बयान के अनुसार जनवरी-मार्च 2020 में कंपनी को 3,214.41 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था। ओएनजीसी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक सुभाष कुमार ने एक निवेशक वार्ता में कहा कि कंपनी को जनवरी-मार्च में उत्पादित और बेचे गए कच्चे तेल के प्रत्येक बैरल के लिए 58.05 अमेरिकी डॉलर का मूल्य मिला, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह आंकड़ा 49.01 अमेरिकी डॉलर था।

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