‘उम्मीद पर दुनिया कायम है….’ लेकिन जब हौसला ही डगमगाने लगे तो क्या करें?

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Positive Life Hacks: कहते हैं कि उम्मीद पर दुनिया कायम है लेकिन लाइफ में कभी ऐसा भी समय आता है जब उम्मीद ही डगमगाने (Hopes Start To Waver) लगती है. तो ऐसे समय में हमें क्या करना चाहिए? दरअसल, जिंदगी में हमेशा परिस्थितियां हमारे अनुरूप नहीं होती हैं. हमने जिस चीज या सिचुएशन के बारे में कभी सोचा ही नहीं होता, वो हमारे सामने एक चुनौती के रूप में खड़ी दिखाई देती है. इस कठिन घड़ी में खड़ा हो पाना भी मुश्किल हो जाता है, ऐसे समय में ही अपनी आशाओं को जिंदा रखना (Keep Hope Alive) बेहद जरूरी हो जाता है. हिंदुस्तान अखबार में छपे आर्टिकल में बताया है कि ऐसी सिचुएशन में हमें क्या करना चाहिए.

जीवन में बहुत कुछ ऐसा है, जो हमारी समझ से परे है. इसका कारण ये है कि हम हालातों को समभाव (Equanimity) से नहीं, बल्कि अपनी सीमित सोच और पक्षपाती रवैये से देखते हैं. कहीं न कहीं हमारी गलतियां हमारे अनुभवों और चुनावों पर टिकी होती है. ऐसे में हमारी उम्मीदें न डगमगाएं इसके लिए कुछ बातों की तरफ ध्यान देने की जरूरत है.

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लाइफ की फिलॉसफी को समझें
जब हौसला कमजोर होने लगे तो जरूरत किसी अंधविश्वास की नहीं, बल्कि अपने विश्वास को मजबूत बनाए रखने की होती है. भारतीय दर्शन (Indian philosophy) सबके भले की कामना करता है. सबको उसका (भलाई) अधिकारी मानता है. हम मानते हैं कि अंत में सब ठीक हो जाता है. आज अगर सब ठीक नहीं है, तो इसका मतलब है कि अभी अंत नहीं हुआ है. जब हम सृष्टि को व्यापक नजरिए से देखते हैं, तब अपने होने का मकसद भी दिखाई देने लगता है.

सुविधाओं की टेंशन न लें
अगर हम अपनी जरूरतों को सीमित करेंगे तो हमें आने वाले कल का डर कम लगेगा और कुछ भी अनिश्चित होगा तो उसे फेस करना हमारे लिए आसान हो जाएगा. अपनी सुविधाओं को ज्यादा तवज्जो देना, चुनौतियों से लड़ने के हमारे इम्यून सिस्टम को वीक कर देता है. अपनी सुविधांओं के बारे में चिंता करते रहना हमारी बेचैनी को बढ़ा देता है. इसलिए दूसरों को कष्ट दिए बिना, सबको साथ जोड़ते हुए आगे बढ़ना, मुश्किल परिस्थिति में भी उम्मीद को जिंदा रखता है.

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खुशी चुनते हुए आगे बढ़ें
आशावादी और निराशावादी व्यक्ति में यही फर्क होता है कि आशावादी मन मुताबिक चीजें न होने पर भी उसमें कुछ न अच्छा खोज लेता है. वहीं निराशावादी खुद को या दूसरों को कोसने में लगे रहते हैं और दुखी होते हैं. कई बार सही-गलत साबित करने से ज्यादा सही अपनी खुशी को चुनते हुए आगे बढ़ना होता है. बिना स्वार्थ दूसरों की मदद करना अच्छे लोगों व अच्छे कामों से जुड़ना हमें खुशी देता है. साहस हमेशा बिना सोचे-समझे चिल्लाने से नहीं होता है. कई बार प्यार से खुद को समझाते हुए अगले दिन की तैयारी करने में ही हमारी कामयाबी होती है.

स्वीकार कर लेने का मतलब हार नहीं
कई ये देखने में आया है कि हम अपनी पूरी एनर्जी ये सोचने में ही लगा देते हैं कि आज जो हो रहा है वो गलत हो रहा है, अब हमसे कुछ नहीं बदलेगा. इसलिए केवल बुरी आशंकाओं के बारे में सोचते रहने के कारण हम आज की खुशियों को नहीं देख पाते हैं. जबकि, दर्शनशास्त्र के मुताबिक हालातों को स्वीकार करना अपनी कोशिशों को नई दिशा देना है. आगे क्या हो सकता है और कैसा होगा, ये समझ लेना छोटी बात नहीं है. स्वीकार कर लेने का मतलब ये नहीं होता है कि हमने हार मान ली है. बल्कि इसका ये अर्थ है कि हम अपनी शक्ति को, अपनी समझ को उन कामों में लगाना चाहते हैं जो हमारे वश में हैं.

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