उज्जैन के इस आश्रम में जन्माष्टमी की धूम, यहां भगवान श्रीकृष्ण ने सीखी थी 64 विद्या

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राहुल सिंह राठौड़/उज्जैन: धार्मिक नगरी उज्जैन जिसे उज्जैनी, अवन्तिका भी कहा गया है. यहां भगवान श्रीकृष्ण ने अपने गुरु सांदीपनि ऋषि से 64 विद्या व 16 कला सीखी और इतिहास रच दिया था. श्रीकृष्ण के साथ उनके मित्र सुदामा व भाई बलराम भी विद्या प्राप्त करने उज्जैन आए थे.कहते हैं विश्व का सबसे पहला गुरुकुल यही रहा है. जिसके कारण अवन्तिका नगरी उज्जैनी के इतिहास में चार चांद लग जाते हैं. 

इस आश्रम में जन्माष्टमी बड़ी ही धूमधाम से मनाई जाती है. आज कृष्ण जन्माष्टमी है और यहां उत्सव का माहौल है. एक दिन पहले से यहां श्रद्धालु मुंबई, गुजरात व अन्य जगह से महृषि सांदीपनि आश्रम पहुंच रहे हैं. श्रद्धालुओं ने ‘नंद के आनंद भयो जय हो नंद लाल की’ के जयकारे लगाए और नाच किया. 

इस साल जन्माष्टमी पर बना यह योग
इस साल शेव और वैष्णव जन्माष्टमी एक ही दिन है . वहीं श्रीकृष्ण के जन्म के समय मंगला तिथि योग, रोहिणी नक्षत्र, स्वार्थ सिद्धि के संयोग बन रहे हैं. जो बेहद शुभ माना जाता है.

ऐसे सजा श्रीकृष्ण मंदिर, राज्यपाल करेंगे दर्शन
यहां श्री कृष्ण के मंदिर में 10 क्विंटल अलग-अलग प्रकार की सब्जियों से आकर्षक सजावट की गई है. मंदिर के पुजारी ने बताया सुबह 10:30 बजे महामहिम राज्यपाल दर्शन करने पहुचेंगे.जिसके बाद सुबह 11 से 11:30 बजे के बीच पंचाभिषेक होगा. 

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मंदिर के मुख्य पुजारी रूपम व्यास ने बताया कि इस साल महंगाई की मार को कम करने और कोविड प्रोटोकॉल पर विशेष ध्यान दिया गया है. बढ़ती महंगाई में आम आदमी ठीक से सब्जियां नहीं खरीद पा रहा है, हम सब्जियों की सजावट कर भगवान से उसके दाम कम करवाने की प्रार्थना करेंगे और यही सब्जियां प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में वितरित करेंगे.

एक साथ 10 ही लोग कर पाएंगे दर्शन
अधीक जानकरी देते हुए पुजरी रूपम व्यास ने कहा कि कोविड प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए एक बार में 10 श्राद्धालुओं को मास्क लगाकर व सैनिटाइजेशन के बाद ही प्रवेश दिया जाएगा. सुबह 7 से रात 10 बजे तक श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे, देर रात 12 बजे श्रीकृष्ण का जन्म होगा. विश्वकल्याण और कोरोना से मुक्ति के लिए जनमोत्स्व पर हवन भी किया जाएगा. 

इस आश्रम का है भगवान कृष्ण से यह नाता
सांदीपनि आश्रम का अपना अलग महत्व है. विश्व के प्रथम गुरु सांदीपनि ऋषि जिन्होंने श्रीकृष्ण को विद्या दी. इनके आश्रम में श्रीकृष्ण जनमोत्स्व, गुरु पूर्णिमा व अन्य सभी पर्व धूम धाम से मनाए जाते हैं. आश्रम मंगलनाथ धाम के समीप क्षिप्रा किनारे बना हुआ है. कहते हैं 5000 साल के भी पहले श्रीकृष्ण,बलराम और सुदामा उज्जैन के संदीपनी आश्रम में गुरु संदीपनी से शिक्षा ग्रहण करने आये थे. दुनिया के प्रथम गुरुकुल माने जाने वाले इस सांदीपनि आश्रम में श्रीकृष्ण 64 दिन रहे थे. यंहा उन्होंने गुरु सांदीपनि से 64 विद्या और 16 कलाओं का ज्ञान लिया था. कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने चार दिन में चार वेद, 6 दिन में छः शास्त्र और 16 दिन में 16 कलाएं, 18 दिन में 18 पुराण, 20 दिन में गीता का ज्ञान प्राप्त कर इतिहास रच दिया था.

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