ई-व्हीकल्स में चीन के दबदबे में भारत ने लगाई सेंध: लीथियम के बजाय एल्युमिनियम बैटरी का इस्तेमाल करेगा, यह सस्ती भी होगी, लीथियम बैटरी के लिए दुनिया चीन पर निर्भर, जबकि एल्यूमीनियम का भारत के पास भंडार

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एक घंटा पहलेलेखक: देबजीत चक्रवर्ती/राजेश कुमार सिंह

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फिनर्जी बैटरी की रेंज 1750 किमी रही है।

दुनिया के साथ-साथ भारत में भी इलेक्ट्रिक गाड़ियों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। पर इनमें लगने वाली लीथियम ऑयन बैटरियों के लिए तमाम देश बहुत हद तक चीन पर निर्भर हैं। चीन के इस साम्राज्य में भारत सेंध लगाने की तैयारी कर रहा है। भारत ऐसी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है, जिसमें बैटरी में मुख्य घटक के तौर पर लीथियम के बजाय एल्युमिनियम इस्तेमाल होता है।

इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत इंडियन ऑयल कार्पोरेशन (आईओसी) ने एल्युमिनियम एयर बैटरी बनाने के लिए इजरायली स्टार्टअप फिनर्जी लिमिटेड के साथ काम शुरू कर दिया है। आईओसी में आरएंडडी निदेशक एसएसवी रामकुमार कहते हैं कि लीथियम दुर्लभ है, इसलिए हमने ऐसे तत्व का इस्तेमाल किया है जो देश में प्राकृतिक रूप से प्रचुरता से उपलब्ध है। एल्युमिनियम बैटरी, लीथियम बैटरियों से कई मामलों में बेहतर साबित होंगी।

अव्वल तो यह संभावित रूप से सस्ती पड़ेगी, इन्हें लंबी रेंज के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा, सुरक्षित भी ज्यादा रहेंगी। बीएनईएफ (लंदन) में एनर्जी स्टोरेज के प्रमुख जेम्स फ्रिथ कहते हैं, बेशक एल्युमिनियम की आपूर्ति लीथियम से बेहतर है। पर लीथियम आधारित प्रणालियों के लगातार गिरते दाम इसे चुनौती देंगे।

ऐसे में डेवलपर्स को ऑक्सीजन-एयर टेक्नोलॉजी को मजबूती देने के लिए इनोवेशन करने होंगे। दरअसल दुनिया के करीब आधे लीथियम पर सीधे और अप्रत्यक्ष तौर पर चीन का कब्जा है। बोलीविया से चिली तक चीन ने लीथियम कारोबार पर अधिकार की कोशिश की है। 2040 तक विश्व की 50% गाड़ियां लीथियम बैटरी से चलेंगी, चीन इसकी सप्लाई देने के लिए बेताब है। फोर्ब्स के मुताबिक इस मामले में चीन नंबर वन है।
भारत बॉक्साइट के शीर्ष 10 उत्पादकों में

एल्युमिनियम को बॉक्साइट अयस्क से निकाला जाता है। भारत दुनिया के शीर्ष 10 बॉक्साइट उत्पादकों में है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत के पास 60 करोड़ टन बॉक्साइट अयस्क का प्रमाणित भंडार है।

आईओसी के 30 हजार फिलिंग स्टेशन, बैटरी स्वैपिंग स्टेशन का काम करेंगे

एल्युमिनियम प्लेट जब हवा में ऑक्सीजन से प्रतिक्रिया करती है तो बनी बिजली को इस्तेमाल कर बैटरी काम करती है। बैटरी के सेल को रिचार्ज नहीं किया जा सकता। इसलिए फिनर्जी नई बैटरी देने और रिसाइकल करने पर काम कर रही है। आईओसी की योजना 30 हजार फिलिंग स्टेशनों को बैटरी स्वैपिंग स्टेशन के रूप में इस्तेमाल करने की है।

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