इश्क़ ही इश्क़ है जहां देखो, पढ़ें मीर तक़ी ‘मीर’ के शेर और शायरी– News18 Hindi

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मीर तक़ी ‘मीर’ के शेर और शायरी (Meer Taqi Meer Shayari): मीर तक़ी ‘मीर’ शायरी की दुनिया में काफी ऊंचा ओहदा रखते हैं. उन्हें ‘खुदा-ए-सुख़न’ कहा जाता है. उर्दू शायरों में भले ही ग़ालिब का नाम लोगों की जुबान बन रहता है लेकिन शायरी का खुदा तो आज भी मीर को ही माना जाता है. मीर ने अपनी शायरी में मोहब्बत की कशमकश को बयां करते हुए खुद मीर ने लिखा है कि- पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है , जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है.’ मीर तक़ी ‘मीर’ की प्रसिद्ध रचनाएं हैं- ज़िक्र-ए-मीर (आत्मकथा), कुल्लीयते-मीर, कुल्लीयते-फ़ारसी, फ़ैज़-ए-मीर, कहानियों , नुकत-उस-शूरा. आइए पढ़ते हैं आज रेख्ता के सभार से हम आपके लिए लाए हैं मीर की मशहूर शायरी….

1. क्या कहूँ तुम से मैं कि क्या है इश्क़

जान का रोग है बला है इश्क़

इश्क़ ही इश्क़ है जहाँ देखो

सारे आलम में भर रहा है इश्क़

इश्क़ है तर्ज़ ओ तौर इश्क़ के तईं

कहीं बंदा कहीं ख़ुदा है इश्क़

इश्क़ मा’शूक़ इश्क़ आशिक़ है

या’नी अपना ही मुब्तला है इश्क़

गर परस्तिश ख़ुदा की साबित की

किसू सूरत में हो भला है इश्क़

दिलकश ऐसा कहाँ है दुश्मन-ए-जाँ

मुद्दई है प मुद्दआ है इश्क़

है हमारे भी तौर का आशिक़

जिस किसी को कहीं हुआ है इश्क़

कोई ख़्वाहाँ नहीं मोहब्बत का

तू कहे जिंस-ए-ना-रवा है इश्क़

‘मीर’-जी ज़र्द होते जाते हो

क्या कहीं तुम ने भी किया है इश्क़

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2. क्या हक़ीक़त कहूँ कि क्या है इश्क़

हक़-शनासों के हाँ ख़ुदा है इश्क़

दिल लगा हो तो जी जहाँ से उठा

मौत का नाम प्यार का है इश्क़

और तदबीर को नहीं कुछ दख़्ल

इश्क़ के दर्द की दवा है इश्क़

क्या डुबाया मुहीत में ग़म के

हम ने जाना था आश्ना है इश्क़

इश्क़ से जा नहीं कोई ख़ाली

दिल से ले अर्श तक भरा है इश्क़

कोहकन क्या पहाड़ काटेगा

पर्दे में ज़ोर-आज़मा है इश्क़

इश्क़ है इश्क़ करने वालों को

कैसा कैसा बहम किया है इश्क़

कौन मक़्सद को इश्क़ बिन पहुँचा

आरज़ू इश्क़ मुद्दआ है इश्क़

‘मीर’ मरना पड़े है ख़ूबाँ पर

इश्क़ मत कर कि बद बला है इश्क़ .





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