इमोशन्स को दबाएं नहीं बल्कि बाहर आने दें, तभी स्ट्रेस दूर होगा: कंचन राय

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कोरोना (Corona) काल का ये वक्त बेहद मुश्किलों भरा है लेकिन इससे निकलना भी बहुत जरूरी है. बेचैनी, तकलीफ, दुख, उदासी और अपनों से बिछड़ने का दर्द बहुत अधिक होता है लेकिन खुद पर काबू पाना जरूरी है और इसके लिए खुश (Happy) रहना पड़ेगा, खुद को संभालना पड़ेगा. इस समय खुद को संभालने की और अपने आसपास के लोगों, दोस्तों और रिश्तेदारों का संबल बनने की जरूरत है. ऐसे में अपनी मेंटल हेल्थ को सुधारने के लिए News18 Hindi की असिसटेंट एडिटर पूजा प्रसाद ने Let Us Talk की फाउंडर और इमोशनल-मेंटल वेल बीइंग एक्सपर्ट कंचन राय से फेसबुक लाइव बातचीत की. उन्होंने इन हालातों से उबरने के लिए कुछ ऐसे टिप्स बताए जिन्हें डे टु डे लाइफ में आसानी से लागू किया जा सकता है.

कंचन राय ने बताया कि आज के इस हालात में खुश रहना बहुत जरूरी है और ये खुशी आपको खुद से ही मिलेगी. खुश रहने के लिए खुद को ही मेहनत करनी पड़ेगी. खुद को हमेशा पॉजिटिव रखना संभव नहीं लेकिन दिमाग में चल रही हर चीज को खुद से समझने की कोशिश करें चाहें वह कोई पॉजिटव सोच हो या नेगेटिव. उनके मुताबिक खुद को कंट्रोल में रखना बहुत ही जरूरी है. कोरोना के इस काल में खुद पर काबू पाना जरूरी है और इसके लिए खुद को ही समझाना होगा. अब पहले जैसे हालात नहीं है कि तनाव या स्ट्रेस होने पर आप लोगों से जाकर मिल सकें. दोस्तों के साथ कुछ पल बिता सकें. इस समय सोशल डिस्टेंसिंग पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है और ऐसे में घर में रहना ही उचित है. हालांकि घर में रहते हुए खुद को अकेला महसूस न करें और कई तरह के कामों में खुद को व्यस्त रखें.

कंचन राय के अनुसार अपने दिमाग और मन में चल रहे सभी विचारों को खुद से महसूस करें और जानने की कोशिश करें कि आपके अंदर ऐसा क्यों हो रहा है. आपके दिमाग में इस तरह के विचार क्यों आ रहे हैं. आप जब एकबार इसका कारण जान लेंगे तो हर हालात से निपटना आपके लिए आसान हो जाएगा. पहले प्रॉब्लब को एक्सेप्ट करें फिर उसका हल ढूंढे. अपने अंदर की सारी इमोशन्स को समझने की कोशिश करें. अपनों को खोने का दुख बहुत होता है लेकिन उसे अंदर न रखें बल्कि बाहर निकालें. आप चाहें तो खूब रो सकते हैं. ऐसा करने से आपका मन हल्का होगा और इमोशन्स भी जल्दी काबू में आ जाएंगे.

किसी अपने के चले जाने के बाद होने वाले तनाव को दूर करने के लिए अपने अंदर के इमोशन्स का बाहर निकलना बहुत ही जरूरी है. आपके साथ कुछ बुरा हुआ हो या फिर आपने किसी अपने को खो दिया हो तो डिप्रेश होने के बजाय मन में पॉजिटिविटी बनाए रखें. अच्छी मेमोरीज को याद करें और कैसे माहौल को पॉजिटिव बना सकें इस बारे में सोचें. उन्होंने बताया कि लोगों के साथ अपने विचारों को शेयर करें. कोरोना के टाइम पर आप वर्चुअली ये काम आसानी से कर सकते हैं. सोशल मीडिया के मदद से आप एकसाथ कई लोगों के साथ अपना समय बिता सकते हैं.

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कंचन राय के मुताबिक मेडिटेशन करना या जिम में वर्कआउट करना टेक्निकली सेम होता है. यह एक कोर्स के समान है जिसे नियमित रूप से करना चाहिए ताकि शरीर इसे एक्सेप्ट कर सके. हालांकि हर चीज में ब्रेक जरूरी है जो कि आपकी मेंटल हेल्थ और फीजिकल हेल्थ दोनों को बैलेंस्ड रखता है. खुद को समय देना भी जरूरी है. जरूरी है कि आप अपना एक टाइम टेबल बना लें और अपने शरीर के हिसाब से ही मेडिटेशन करें. जरूरी नहीं कि बहुत अधिक समय तक मेडिटेशन करने से सबकुछ ठीक हो जाएगा बल्कि सही तरीके से करने से चीजें सही होंगी. मेडिटेशन करने का कोई समय नहीं होता. आप जब भी अपने अंदर तनाव महसूस करें तभी मेडिटेशन कर सकते हैं. इसमें दिन या रात का कोई काम नहीं. मेडिटेशन के लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह भी ले सकते हैं ताकि चीजों को आप सही से बैलेंस कर सकें.



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