आपको दिल की बीमारी है या नहीं, अब ‘सेल्फी’ से चलेगा आसानी से पता!

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नई दिल्ली: क्या सेल्फी (selfie) से किसी व्यक्ति की बीमारियों का पता लगाया जा सकता है? आने वाले दिनों में आप इस सवाल का जवाब ‘हां’ में दे पाएंगे. एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि सेल्फी के जरिये पता लगाया जा सकता है कि संबंधित व्यक्ति दिल से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित है या नहीं. 

यूरोपियन हार्ट जर्नल (European Heart Journal) ने अपने रिसर्च पेपर में यह उल्लेख किया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial intelligence) की मदद से सेल्फी बीमारियों की पहचान उजागर कर सकती है. उसके अनुसार, कंप्यूटर एल्गोरिथ्म (Computer Algorithm) के उपयोग से किसी व्यक्ति की चार सेल्फी का विश्लेषण करने के बाद कोरोनरी धमनी रोग (सीएडी) का पता लगाया जा सकता है. 

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हालांकि एल्गोरिथ्म को अभी बड़े पैमाने पर टेस्ट करने की जरूरत है. शोधकर्ताओं का कहना है कि इसे एक स्क्रीनिंग टूल के रूप में उपयोग किया जा सकता है, जो लोगों में संभावित हृदय रोग की पहचान कर सकता है. इस टेक्नोलॉजी की मदद से उच्च जोखिम वाले लोगों में बीमारी की जल्द पहचान में मदद मिलेगी और उन्हें समय रहते इलाज उपलब्ध कराया जा सकेगा.

यह एक ज्ञात तथ्य है कि चेहरे की कुछ विशेषताएं हृदय रोग के बढ़ते जोखिम से जुड़ी होती हैं, जिसमें पतले या भूरे बाल, झुर्रियां आदि शामिल हैं. हालांकि, इनके जरिये रोग का सटीक अनुमान लगाना बेहद मुश्किल होता है. इस अध्ययन को दो चरणों में विभाजित किया गया था, जिसमें रोगियों को कई प्रक्रियाओं से गुजारा गया. इन प्रक्रियाओं से पहले प्रशिक्षित नर्सों द्वारा रोगियों का साक्षात्कार किया गया. इस दौरान, उनकी सामाजिक आर्थिक स्थिति, जीवन शैली (शराब, मांस, फास्ट फूड का सेवन, और स्पोर्ट्स), क्लीनिकल प्रिजेंटेशन, पारिवारिक इतिहास और दवाओं से संबंधित डेटा इकत्र किया गया. साथ ही डिजिटल कैमरे से निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार उनके फोटो खींचे गए. 

शोधकर्ताओं ने चीन के नौ अस्पतालों के 1,013 मरीजों पर एल्गोरिथ्म का परीक्षण किया, जो अप्रैल 2019 और जुलाई 2019 के बीच भर्ती हुए थे. उन्होंने पाया कि एल्गोरिथ्म हृदय रोग के जोखिम की भविष्यवाणी करने के मौजूदा तरीकों से बेहतर है. अध्ययन में एल्गोरिथ्म ने 80% मामलों में हृदय रोग का सटीक रूप से पता लगाया. हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि इस एल्गोरिथ्म को बड़े पैमाने पर टेस्ट किये जाने की जरूरत है. वैसे, इसके दुरुपयोग की आशंका भी जताई जा रही है.    

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